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श्रीराम जन्मभूमि प्रतीकश्रीराम जन्मभूमिअयोध्या · रामायण · यात्रा मार्गदर्शिका

पंचांग · अयोध्या

पंचांग, 22 दिसम्बर 2024

रविवार · सप्तमी, कृष्ण पक्ष · पौष मास · विक्रम संवत् 2081

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तिथिसप्तमी (कृष्ण पक्ष) तक 14:33, फिर अष्टमी
नक्षत्रउत्तरा फाल्गुनी (चरण 1) तक 09:09, फिर हस्त
योगआयुष्मान तक 18:58
करण (सूर्योदय पर)बव
वाररविवार
चन्द्र राशिसिंह, में प्रवेश कन्या 12:55
सूर्य राशिधनु
सूर्योदय / सूर्यास्त06:46 / 17:13
मास (पूर्णिमान्त)पौष · अमान्त: मार्गशीर्ष
अयनांश (लाहिड़ी)24° 12'

शुभ और अशुभ समय

अभिजीत मुहूर्त11:38–12:20
राहुकाल15:54–17:13
यमगण्ड11:59–13:18
गुलिक काल14:36–15:54

स्थिर नक्षत्र: स्थायी काम, नींव, पौधारोपण, घर ख़रीदने और लम्बी योजनाओं के लिए अच्छा।

चौघड़िया

दिन
उद्वेग06:46–08:04
चर08:04–09:22
लाभ09:22–10:41
अमृत10:41–11:59
काल11:59–13:18
शुभ13:18–14:36
रोग14:36–15:54
उद्वेग15:54–17:13
रात
शुभ17:13–18:55
अमृत18:55–20:36
चर20:36–22:18
रोग22:18–00:00
काल00:00–01:41
लाभ01:41–03:23
उद्वेग03:23–05:05
शुभ05:05–06:46

पंचांग के पाँच अंग

  • तिथि: चान्द्र दिवस, सूर्य से चन्द्रमा की दूरी के हर 12 अंश पर; एक चान्द्र मास में 30।
  • वार: सप्ताह का दिन, सूर्योदय से सूर्योदय तक।
  • नक्षत्र: चन्द्रमा जिस नक्षत्र में है, 13°20' के 27 भागों में से एक।
  • योग: सूर्य और चन्द्रमा के भोगांश के योग से; कुल 27।
  • करण: आधी तिथि; शुभ कार्यों में विष्टि (भद्रा) टाली जाती है।

आम प्रश्न

राहुकाल क्या है?

राहुकाल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) के आठ बराबर भागों में से एक है, जो वार के अनुसार तय होता है। परम्परा में इसमें नया और शुभ काम आरम्भ नहीं किया जाता।

पंचांग शहर के अनुसार अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त स्थान के साथ बदलते हैं, और दिन की तिथि व नक्षत्र स्थानीय सूर्योदय पर लिए जाते हैं; राहुकाल और चौघड़िया भी स्थानीय सूर्योदय से गिने जाते हैं।

चौघड़िया क्या है?

दिन और रात, दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है जिन्हें चौघड़िया कहते हैं। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे, चर यात्रा के लिए अच्छा, और उद्वेग, काल व रोग महत्त्वपूर्ण कामों के लिए टाले जाते हैं।

ज्योतिष चिन्तन के लिए एक पारम्परिक मार्गदर्शन है, निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, धन, कानूनी या विवाह सम्बन्धी निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञों और पूरी कुण्डली देखने वाले विद्वान ज्योतिषी से सलाह लें। गणना: लाहिड़ी अयनांश; चन्द्रमा और ग्रह मानक खगोलीय सूत्रों से।