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अयोध्याकाण्ड: वचन और वनवास
रामायण का दूसरा काण्ड: राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी के दो वर, सीता-लक्ष्मण सहित राम का वनवास, और भरत का राज्य लेने से इनकार।
अरण्यकाण्ड: वन के वर्ष
रामायण का तीसरा काण्ड: दण्डक और पंचवटी का जीवन, शूर्पणखा, स्वर्ण मृग, रावण द्वारा सीता-हरण, जटायु और शबरी।
सुन्दरकाण्ड: हनुमान की लंका-यात्रा
रामायण का पाँचवाँ और सबसे प्रिय काण्ड: हनुमान समुद्र लाँघते हैं, अशोक वाटिका में सीता को पाते हैं, लंका दहन करते हैं और संदेश लेकर लौटते हैं।
सच्ची मित्रता: गुह, सुग्रीव और विभीषण
श्रीराम ने निषादराज, निर्वासित वानर और शत्रु के भाई को मित्र बनाया। रामायण के अनुसार मित्र कौन है और मित्र का कर्तव्य क्या है।
विनम्रता और सेवा: हनुमान का मार्ग
हनुमान ने समुद्र लाँघा, लंका जलाई और पर्वत उठाया, और किसी का श्रेय नहीं लिया। बल, कर्म और अहंकार पर उनके उदाहरण की सीख।
अहंकार पर विजय: रावण की सीख
रावण के पास विद्या, बल और स्वर्ण-नगरी थी, और अहंकार व वासना में उसने सब खो दिया। रामायण ने खलनायक को विद्वान क्यों बनाया, और यह किससे सावधान करता है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या
अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर बना मंदिर: कथा, वास्तुकला, रामलला का विग्रह, दर्शन की व्यवस्था और यात्रियों के लिए उपयोगी सुझाव।
कनक भवन: सीता-राम का महल
अयोध्या का कनक भवन वह स्वर्ण महल माना जाता है जो कैकेयी ने नववधू सीता को दिया। इसकी कथा, स्वर्ण-मुकुटधारी विग्रह और दर्शन की जानकारी।
भरत कुण्ड, नन्दीग्राम: जहाँ भरत ने प्रतीक्षा की
अयोध्या के पास नन्दीग्राम का भरत कुण्ड वह स्थान माना जाता है जहाँ भरत ने चौदह वर्ष तपस्वी रहकर राम की पादुकाओं के नाम पर शासन किया।

