रघुकुल
रघुकुल: अयोध्या के सूर्यवंशी राजा
श्रीराम का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ, जिसे सूर्यवंश और महान राजा रघु के नाम पर रघुकुल भी कहा जाता है। परम्परा इस कुल को सबसे अधिक एक नियम के लिए याद करती है: दिया हुआ वचन निभाया जाता है, चाहे मूल्य कुछ भी हो। नीचे दिए राजाओं का वर्णन रामायण और पुराणों में मिलता है, और उनकी कथाएँ बताती हैं कि अयोध्या को राम से इतनी अपेक्षा क्यों थी।
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इक्ष्वाकु: सूर्यवंश के संस्थापक
वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु अयोध्या के प्रथम राजा और उस सूर्यवंश के संस्थापक माने जाते हैं जिसमें श्रीराम का जन्म हुआ।
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सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र
अयोध्या के राजा हरिश्चन्द्र ने वचन तोड़ने के बजाय राज्य दे दिया और स्वयं को बेच दिया। उनकी कथा ने उनके नाम को सत्य का पर्याय बना दिया।
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राजा सगर और उनके साठ हज़ार पुत्र
अयोध्या के राजा सगर, खोया हुआ यज्ञ-अश्व, कपिल मुनि की दृष्टि से भस्म हुए साठ हज़ार पुत्र, और वह संकल्प जो आगे गंगा को धरती पर लाया।
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भगीरथ: जो गंगा को धरती पर लाए
अयोध्या के राजा भगीरथ ने पूर्वजों की मुक्ति हेतु गंगा को स्वर्ग से लाने के लिए राज्य छोड़कर वर्षों तप किया। उनका नाम अथक प्रयास का पर्याय है।
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राजा दिलीप और नन्दिनी की सेवा
अयोध्या के राजा दिलीप ने सेवक की भाँति नन्दिनी गाय की सेवा की और उसे बचाने के लिए सिंह को अपना शरीर अर्पित किया। कालिदास वर्णित रघु के पिता।
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महाराज रघु: जिनसे वंश का नाम पड़ा
महाराज रघु ने चारों दिशाएँ जीतीं, फिर अपना सर्वस्व दान कर दिया। कौत्स की गुरु-दक्षिणा की कथा, और श्रीराम को राघव क्यों कहा जाता है।
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अज और इन्दुमती: श्रीराम के पितामह
रघु के पुत्र और दशरथ के पिता राजा अज ने स्वयंवर में इन्दुमती को पाया और एक गिरती माला से उन्हें खो दिया। प्रेम, शोक और कर्तव्य की कथा।
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महाराज दशरथ: श्रीराम के पिता
अयोध्या के महाराज दशरथ: दसों दिशाओं में रथ चलाने वाले योद्धा, कैकेयी को दिए दो वर, श्रवण कुमार का शाप, और पुत्र-वियोग में पिता का देहान्त।
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लव और कुश: राम-सीता के पुत्र
श्रीराम और सीता के जुड़वाँ पुत्र लव-कुश वाल्मीकि आश्रम में पले, पिता के सामने रामायण गाई और उनके बाद रघुकुल को आगे बढ़ाया।
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