श्रीराम जन्मभूमिअयोध्या · रामायण · यात्रा मार्गदर्शिका

अयोध्या राम मंदिर: आम प्रश्नों के उत्तर

अयोध्या और राम मंदिर के बारे में यात्रियों के सबसे आम प्रश्नों के छोटे, सीधे उत्तर: शुल्क, फ़ोन, वेश, समय, कितने दिन, कहाँ ठहरें और सुरक्षा।

ये वे प्रश्न हैं जो पहली बार आने वाले यात्री सबसे अधिक पूछते हैं। हर उत्तर छोटा है और पूरी जानकारी वाले पृष्ठ से जुड़ा है। नियम और समय बदलते रहते हैं, इसलिए जो बात आपकी योजना के लिए महत्त्वपूर्ण हो, उसकी पुष्टि उत्तर में बताए आधिकारिक स्रोत से कर लें।

क्या राम मंदिर में प्रवेश शुल्क है?

नहीं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन सबके लिए निःशुल्क हैं। कोई व्यक्ति, एजेंट या वेबसाइट प्रवेश, पंक्ति में स्थान या "वीआईपी दर्शन" नहीं बेच सकती। आरती के पास, जहाँ उपलब्ध हों, केवल मंदिर न्यास जारी करता है।

क्या मोबाइल फ़ोन भीतर ले जा सकते हैं?

नहीं। फ़ोन, कैमरा, स्मार्ट वॉच, अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ, बैग और चमड़े का सामान भीतर वर्जित है। इन्हें होटल में छोड़ें या तीर्थयात्री सुविधा केन्द्र के काउण्टर पर जमा कराएँ और टोकन सँभालकर रखें। देखें दर्शन मार्गदर्शिका।

दर्शन का समय क्या है?

मंदिर दिन के अधिकांश समय खुला रहता है और दोपहर के आसपास कुछ समय बन्द रहता है। समय ऋतु और पर्वों के अनुसार बदलता है, इसलिए हम निश्चित समय नहीं छापते। यात्रा से कुछ पहले न्यास की आधिकारिक वेबसाइट srjbtkshetra.org देखें।

दर्शन में कितना समय लगता है?

सामान्य कार्य-दिवस पर प्रवेश-स्थल से लौटने तक, सुरक्षा जाँच और पैदल मार्ग सहित, दो से तीन घंटे रखें। सप्ताहान्त, मंगलवार और पर्वों पर बहुत अधिक समय लगता है।

क्या कोई वेश-नियम है?

कोई कड़ा नियम नहीं, पर शालीन वस्त्र पहनें जिनसे कन्धे और घुटने ढके हों। भारतीय वेश प्रचलित है। प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतारे जाते हैं। देखें मंदिर की मर्यादा।

पहले किस मंदिर में जाएँ?

पुरानी परम्परा के अनुसार श्रद्धालु पहले हनुमानगढ़ी जाते हैं, नगर के रक्षक हनुमान की आज्ञा लेने, और उसके बाद राम मंदिर।

अयोध्या के लिए कितने दिन पर्याप्त हैं?

एक पूरे दिन में मुख्य मंदिर और सरयू की संध्या आरती हो जाती है। दो दिन में गुप्तार घाट, नन्दीग्राम और सूरज कुण्ड भी इत्मीनान से देखे जा सकते हैं। देखें एक दिन में अयोध्या और दो दिन की योजना।

आने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

अक्टूबर से मार्च तक मौसम सबसे सुखद रहता है। मई और जून में बहुत गर्मी होती है। सबसे अधिक भीड़ रामनवमी, दीपावली से पहले के दीपोत्सव, कार्तिक परिक्रमा और नव वर्ष के सप्ताह में रहती है। देखें जाने का उत्तम समय।

अयोध्या कैसे पहुँचें?

अयोध्या का अपना हवाई अड्डा और दो रेलवे स्टेशन हैं; मंदिरों के सबसे निकट अयोध्या धाम जंक्शन है। लखनऊ सड़क से लगभग 135 किमी दूर है। देखें अयोध्या कैसे पहुँचें।

कहाँ ठहरें?

मंदिरों तक पैदल जाना हो तो राम पथ या नया घाट के पास ठहरें; अधिक होटल और शान्त रातें चाहिए तो सिविल लाइंस क्षेत्र में। पर्वों के लिए पहले से बुक करें और नकली बुकिंग पेजों से सावधान रहें। देखें कहाँ ठहरें और डायरेक्टरी।

क्या बुज़ुर्ग माता-पिता के लिए अयोध्या उपयुक्त है?

हाँ, योजना के साथ। राम मंदिर के सुविधा केन्द्र पर व्हीलचेयर और सहायता मिलती है; सबसे कठिन भाग हनुमानगढ़ी की 76 सीढ़ियाँ हैं। देखें बुज़ुर्गों और बच्चों के साथ अयोध्या।

क्या मांसाहार या मदिरा मिलती है?

मंदिर-नगरी में नहीं। वहाँ भोजन शाकाहारी है और मदिरा न परोसी जाती है, न बिकती है।

क्या अयोध्या सुरक्षित है?

हाँ। नगर में पर्याप्त पुलिस व्यवस्था है। मुख्य जोखिम भीड़, गर्मी और कभी-कभार ठगी हैं। आपात स्थिति में 112 डायल करें। देखें सुरक्षा सुझाव और हेल्पलाइन पृष्ठ।

क्या विदेशी और अन्य मतों के लोग आ सकते हैं?

हाँ। इस साइट पर बताए गए मंदिरों में हर पृष्ठभूमि के यात्रियों का स्वागत है, उन्हीं नियमों के साथ जो सबके लिए हैं। देखें विदेश से अयोध्या यात्रा।

क्या इस वेबसाइट से मंदिर के लिए दान दे सकते हैं?

नहीं। यह एक स्वतंत्र वेबसाइट है और हम दान एकत्र नहीं करते। दान केवल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के आधिकारिक माध्यमों से दें।

आने से पहले कथा कहाँ पढ़ें?

सम्पूर्ण रामायण कथा पढ़ें या सुनें, संक्षेप में श्रीराम का जीवन, और हनुमान चालीसा।

कोई प्रश्न यहाँ नहीं है? हमसे पूछें।

अंतिम अद्यतन:

आगे पढ़ें

रामायण

अरण्यकाण्ड: वन के वर्ष

रामायण का तीसरा काण्ड: दण्डक और पंचवटी का जीवन, शूर्पणखा, स्वर्ण मृग, रावण द्वारा सीता-हरण, जटायु और शबरी।

रामायण

सुन्दरकाण्ड: हनुमान की लंका-यात्रा

रामायण का पाँचवाँ और सबसे प्रिय काण्ड: हनुमान समुद्र लाँघते हैं, अशोक वाटिका में सीता को पाते हैं, लंका दहन करते हैं और संदेश लेकर लौटते हैं।

जीवन-शिक्षा

माता-पिता और गुरु का सम्मान

श्रीराम ने दशरथ, कौशल्या, कैकेयी, वसिष्ठ और विश्वामित्र का सम्मान कैसे किया, वनवास देने वाली माता को दोष क्यों नहीं दिया, और आज इसका क्या अर्थ है।

जीवन-शिक्षा

अहंकार पर विजय: रावण की सीख

रावण के पास विद्या, बल और स्वर्ण-नगरी थी, और अहंकार व वासना में उसने सब खो दिया। रामायण ने खलनायक को विद्वान क्यों बनाया, और यह किससे सावधान करता है।

अयोध्या

दशरथ महल: राजमहल

अयोध्या के रामकोट का दशरथ महल महाराज दशरथ के महल का स्थान माना जाता है, जहाँ श्रीराम और उनके भाई बड़े हुए। कथा और दर्शन के सुझाव।

अयोध्या

सीता की रसोई

अयोध्या में जन्मभूमि के पास सीता की रसोई वह स्थान मानी जाती है जहाँ नववधू सीता ने पहली बार भोजन बनाया। इसका अर्थ और अन्नपूर्णा परम्परा।

अयोध्या

लता मंगेशकर चौक और विशाल वीणा

अयोध्या में नया घाट के पास लता मंगेशकर चौक एक प्रमुख चौराहा है, जहाँ असंख्य राम-भजन गाने वाली गायिका के सम्मान में 40 फुट की वीणा स्थापित है।