श्रीराम: जीवन, कर्म और संदेश
श्रीराम कौन हैं, अयोध्या में जन्म से रामराज्य तक उन्होंने क्या किया, जीवन के निर्णायक क्षणों में क्या कहा, और उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहा जाता है।
श्रीराम कौन हैं
श्रीराम रामायण के नायक हैं: अयोध्या के राजकुमार और बाद में राजा, सूर्यवंशी रघुकुल में महाराज दशरथ और माता कौशल्या के ज्येष्ठ पुत्र। हिन्दू परम्परा उन्हें भगवान विष्णु के सातवें अवतार के रूप में पूजती है। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है: पुरुषों में श्रेष्ठ, जिन्होंने किसी भी मूल्य पर मर्यादा की रेखा नहीं लाँघी।
रामायण ऐसे ईश्वर की कथा नहीं कहती जो सहज ही जीत जाता है। वह ऐसे मनुष्य को दिखाती है जो राजसिंहासन, घर और कुछ समय के लिए अपनी पत्नी तक खो देता है, और हर हानि के सामने एक ही प्रश्न पूछता है: यहाँ उचित क्या है?
अयोध्या में जन्म और बाल्यकाल
राम का जन्म अयोध्या में चैत्र शुक्ल नवमी को हुआ, जिसे आज रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। उनके भाई भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न थे। राजकुमारों ने गुरु वसिष्ठ से शिक्षा पाई। किशोर अवस्था में ही राम ऋषि विश्वामित्र के साथ यज्ञों की रक्षा के लिए गए, और मिथिला में शिव-धनुष भंग कर सीता से विवाह किया। यह कथा बालकाण्ड में है।
वनवास: पिता के वचन के लिए चौदह वर्ष
राज्याभिषेक की पूर्व संध्या पर रानी कैकेयी ने दशरथ से दो वर माँगे: भरत के लिए राज्य और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास। राजा यह कह न सके। राम ने स्वयं स्वीकार कर लिया, क्योंकि पिता का वचन टूटना अयोध्या के लिए एक राजकुमार के जाने से बड़ी हानि होती। सीता और लक्ष्मण ने साथ चलना चुना। देखें अयोध्याकाण्ड।
वन, सीता-हरण और मैत्री
वन में राम ने ऋषियों की रक्षा की, वृद्धा भक्त शबरी के बेर खाए और गिद्धराज जटायु का अन्तिम संस्कार पुत्र की तरह किया। जब लंकापति रावण सीता को हर ले गया, तब राम के पास सेना नहीं थी। उनके पास मित्रता थी: किष्किन्धा के सुग्रीव से और सबसे बढ़कर हनुमान से। ये वर्ष अरण्य, किष्किन्धा और सुन्दरकाण्ड में वर्णित हैं।
लंका का युद्ध और वापसी
राम की सेना ने समुद्र पर सेतु बाँधा, और युद्ध से पहले राम ने अंगद को भेजकर रावण को सन्धि का अवसर दिया कि वह सीता को लौटा दे। रावण ने नहीं माना और युद्धकाण्ड में वर्णित युद्ध में मारा गया। राम ने लंका स्वयं नहीं ली, रावण के धर्मनिष्ठ भाई विभीषण को दी, और अयोध्या लौटे, जहाँ प्रजा ने हर मार्ग पर दीप जलाए। वही रात दीपावली है, जिसे अयोध्या आज दीपोत्सव के रूप में जीती है।
रामराज्य
राम का शासन भारत में सुशासन का पर्याय बन गया: ऐसा राज्य जहाँ कोई भूखा नहीं, किसी को चोर का भय नहीं, और राजा स्वयं को प्रजा से कठोर नियम में बाँधता है। विस्तार से पढ़ें: रामराज्य: सेवा के रूप में नेतृत्व।
श्रीराम ने क्या कहा
- पिता के वचन पर: पिता कहें तो मैं अग्नि में प्रवेश कर जाऊँ या विष पी लूँ; पिता की सेवा और उनके वचन के पालन से बड़ा कोई धर्म नहीं।
- शत्रु-पक्ष से आए विभीषण से: जो एक बार भी मेरी शरण में आकर कहे "मैं तुम्हारा हूँ", उसे मैं अभय देता हूँ। यह मेरा व्रत है।
- अपने वचन पर: राम दो बार नहीं बोलता। जो एक बार कह दिया, वही करता है।
उनका जीवन हमारे लिए मार्ग क्यों है
राम के निर्णय हर कोई अपना सकता है: वचन निभाओ, माता-पिता का सम्मान करो, मित्र का साथ दो, सबसे साधारण व्यक्ति से भी आदर से मिलो, अनुचित मार्ग से लाभ न लो, और जब शक्ति मिले तो उसे आश्रितों के लिए लगाओ। शिक्षाएँ खण्ड में इन पर एक-एक करके विचार है। इन प्रसंगों की स्मृति जहाँ बसी है उन अयोध्या के स्थलों को देखें, आरम्भ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से करें।
अंतिम अद्यतन:
आगे पढ़ें
बालकाण्ड: श्रीराम का जन्म और बाल्यकाल
रामायण का पहला काण्ड: दशरथ का यज्ञ, अयोध्या में चारों राजकुमारों का जन्म, विश्वामित्र के साथ यात्रा और राम-सीता का विवाह।
युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका का युद्ध
रामायण का छठा काण्ड: विभीषण की शरणागति, समुद्र पर सेतु, कुम्भकर्ण, मेघनाद और रावण का अन्त, और अयोध्या वापसी।
उत्तरकाण्ड: रामराज्य और उसके बाद
रामायण का सातवाँ काण्ड: राम का शासन, वाल्मीकि आश्रम में सीता, लव-कुश का जन्म, और सरयू तट पर राम का महाप्रस्थान।
वचन की शक्ति: प्राण जाइ पर वचन न जाई
श्रीराम ने पिता का वचन निभाने के लिए राज्य क्यों छोड़ा, रघुकुल की रीति के पीछे का तर्क, और दैनिक जीवन में इसे कैसे अपनाएँ।
भ्रातृ-प्रेम और परिवार: भरत और लक्ष्मण
चार भाई और एक सिंहासन जिसे कोई दूसरे से छीनना नहीं चाहता: भाई-बहन, उत्तराधिकार और परिवार को जोड़े रखने पर रामायण की सीख।
सीता की गरिमा और दृढ़ता
सीता ने वन चुना, वर्ष भर अकेले रावण का सामना किया, अकेले दो पुत्रों को पाला और अपनी शर्त पर विदा हुईं। आन्तरिक शक्ति पर उनके जीवन की सीख।
दशरथ महल: राजमहल
अयोध्या के रामकोट का दशरथ महल महाराज दशरथ के महल का स्थान माना जाता है, जहाँ श्रीराम और उनके भाई बड़े हुए। कथा और दर्शन के सुझाव।
नागेश्वरनाथ मंदिर: कुश द्वारा स्थापित
अयोध्या में राम की पैड़ी पर स्थित शिव मंदिर नागेश्वरनाथ श्रीराम के पुत्र कुश द्वारा स्थापित माना जाता है। खोए हुए कंगन की कथा।
सूरज कुण्ड: सूर्य का सरोवर
अयोध्या के पास दर्शन नगर का सूरज कुण्ड एक प्राचीन सीढ़ीदार सरोवर और सूर्य मंदिर है, जो श्रीराम के सूर्यवंशी पूर्वजों से जुड़ा है।
