श्रीमद्भगवद्गीता: सभी 18 अध्याय सरल हिन्दी अर्थ सहित
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय-दर-अध्याय: सभी 700 श्लोकों का भाव क्रम से सरल हिन्दी में, प्रमुख संस्कृत श्लोक अर्थ सहित और हर अध्याय की सीख। पढ़ें या सुनें।
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अन्य भाषाएँ गूगल अनुवाद से खुलती हैं; फिर आपका फ़ोन उस भाषा में पृष्ठ पढ़कर सुना सकता है।श्रीमद्भगवद्गीता वह संवाद है जो कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में, दोनों सेनाओं के बीच, भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ। अर्जुन अपने ही सम्बन्धियों और गुरुजनों को सामने देखकर शोक और मोह में डूब गए और धनुष रख दिया। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें जीवन, कर्तव्य, आत्मा और ईश्वर का जो ज्ञान दिया, वही गीता है। यह महाभारत के भीष्म पर्व का भाग है और इसके रचयिता महर्षि वेदव्यास हैं। संजय, जिन्हें व्यास जी ने दिव्य दृष्टि दी थी, यह संवाद राजा धृतराष्ट्र को सुनाते हैं।
गीता को उपनिषदों का सार कहा गया है: "सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपालनन्दनः" — सारे उपनिषद गौएँ हैं, श्रीकृष्ण उन्हें दुहने वाले हैं, अर्जुन बछड़ा है और गीता का ज्ञान दूध है।
गीता की बनावट: तीन षट्क
परम्परा में 18 अध्यायों को छह-छह के तीन भागों में देखा जाता है।
- अध्याय 1 से 6 (कर्म षट्क): कर्तव्य से भागना समाधान नहीं; फल की आसक्ति छोड़कर कर्म करना ही योग है। मन को वश में करने और ध्यान की विधि।
- अध्याय 7 से 12 (भक्ति षट्क): ईश्वर कौन है, संसार उनसे कैसे जुड़ा है, उनकी विभूतियाँ, विराट रूप, और प्रेम से की गई भक्ति ही सबसे सरल मार्ग क्यों है।
- अध्याय 13 से 18 (ज्ञान षट्क): शरीर और आत्मा का भेद, तीन गुण, पुरुषोत्तम, दैवी और आसुरी स्वभाव, श्रद्धा के तीन प्रकार, और अन्त में पूर्ण शरणागति।
सभी 18 अध्याय एक दृष्टि में
- 1. अर्जुनविषादयोग (47 श्लोक): सेनाओं का वर्णन और अर्जुन का शोक।
- 2. सांख्ययोग (72): आत्मा अमर है; "कर्मण्येवाधिकारस्ते"; स्थितप्रज्ञ के लक्षण।
- 3. कर्मयोग (43): कर्म छोड़ा नहीं जा सकता; यज्ञ भाव से कर्म; काम ही शत्रु है।
- 4. ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (42): अवतार का रहस्य; "यदा यदा हि धर्मस्य"; ज्ञान की अग्नि।
- 5. कर्मसंन्यासयोग (29): संन्यास और कर्मयोग एक ही लक्ष्य तक; कमल-पत्र की तरह निर्लेप।
- 6. आत्मसंयमयोग (47): ध्यान की विधि; मन का निग्रह अभ्यास और वैराग्य से।
- 7. ज्ञानविज्ञानयोग (30): परा और अपरा प्रकृति; चार प्रकार के भक्त।
- 8. अक्षरब्रह्मयोग (28): अन्तकाल का स्मरण; शुक्ल और कृष्ण मार्ग।
- 9. राजविद्याराजगुह्ययोग (34): "पत्रं पुष्पं फलं तोयम्"; "योगक्षेमं वहाम्यहम्"।
- 10. विभूतियोग (42): संसार की हर श्रेष्ठ वस्तु में भगवान का तेज।
- 11. विश्वरूपदर्शनयोग (55): अर्जुन को विराट रूप का दर्शन।
- 12. भक्तियोग (20): प्रिय भक्त के लक्षण।
- 13. क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (34): शरीर क्षेत्र है, आत्मा क्षेत्रज्ञ।
- 14. गुणत्रयविभागयोग (27): सत्त्व, रज और तम; गुणातीत कौन।
- 15. पुरुषोत्तमयोग (20): उल्टा अश्वत्थ वृक्ष; पुरुषोत्तम।
- 16. दैवासुरसम्पद्विभागयोग (24): दैवी गुण; नरक के तीन द्वार।
- 17. श्रद्धात्रयविभागयोग (28): तीन प्रकार की श्रद्धा, आहार, तप और दान; ॐ तत् सत्।
- 18. मोक्षसंन्यासयोग (78): त्याग का अर्थ; "सर्वधर्मान्परित्यज्य"; अर्जुन का मोह नष्ट।
गीता पाठ कैसे करें
प्रतिदिन एक अध्याय पढ़ने से 18 दिन में पूरी गीता हो जाती है। स्नान के बाद शान्त स्थान पर बैठें, पहले भगवान का ध्यान करें, फिर अध्याय पढ़ें या यहाँ "सुनें" दबाकर सुनें। केवल शब्द नहीं, अर्थ समझना ही गीता पाठ का फल है। जो एक साथ नहीं पढ़ सकते, वे बारहवाँ अध्याय (भक्तियोग, 20 श्लोक) या पन्द्रहवाँ अध्याय (पुरुषोत्तमयोग, 20 श्लोक) प्रतिदिन पढ़ सकते हैं; ये परम्परा में विशेष प्रिय हैं।
आम प्रश्न
गीता में कितने अध्याय और श्लोक हैं?
18 अध्याय और 700 श्लोक। इनमें श्रीकृष्ण के 574, अर्जुन के 84, संजय के 41 और धृतराष्ट्र का 1 श्लोक है (गीता प्रेस पाठ के अनुसार)।
गीता किसने किसको सुनाई?
भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में सुनाई। संजय ने यही संवाद धृतराष्ट्र को सुनाया, और महर्षि वेदव्यास ने इसे महाभारत में लिखा।
गीता जयन्ती कब होती है?
मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को, जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहते हैं।
गीता का सबसे प्रसिद्ध श्लोक कौन-सा है?
दूसरे अध्याय का 47वाँ श्लोक "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन", और अठारहवें अध्याय का 66वाँ श्लोक "सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज"।
सभी अध्याय: पढ़ें और सुनें
- 1भगवद गीता अध्याय 1: अर्जुनविषादयोग — सरल हिन्दी अर्थ और सारगीता का पहला अध्याय, सभी 47 श्लोकों का भाव क्रम से: धृतराष्ट्र का प्रश्न, कुरुक्षेत्र में दोनों सेनाएँ, शंखनाद, और अर्जुन का शोक जिसके कारण…🔊
- 2भगवद गीता अध्याय 2: सांख्ययोग — कर्मण्येवाधिकारस्ते और स्थितप्रज्ञ, सरल अर्थगीता का दूसरा अध्याय, सभी 72 श्लोकों का भाव क्रम से: अर्जुन की शरणागति, आत्मा की अमरता, क्षत्रिय धर्म, कर्मयोग और "कर्मण्येवाधिकारस्ते", तथ…🔊
- 3भगवद गीता अध्याय 3: कर्मयोग — सरल हिन्दी अर्थ और सारगीता का तीसरा अध्याय, सभी 43 श्लोकों का भाव क्रम से: कोई कर्म क्यों नहीं छोड़ सकता, यज्ञ भाव से कर्म, लोकसंग्रह, स्वधर्म, और काम ही असली शत…🔊
- 4भगवद गीता अध्याय 4: ज्ञानकर्मसंन्यासयोग — यदा यदा हि धर्मस्य, सरल अर्थगीता का चौथा अध्याय, सभी 42 श्लोकों का भाव क्रम से: इस ज्ञान की प्राचीन परम्परा, भगवान कब और क्यों अवतार लेते हैं, कर्म-अकर्म का रहस्य, यज्…🔊
- 5भगवद गीता अध्याय 5: कर्मसंन्यासयोग — सरल हिन्दी अर्थ और सारगीता का पाँचवाँ अध्याय, सभी 29 श्लोकों का भाव क्रम से: संन्यास श्रेष्ठ है या कर्मयोग, कमल-पत्र की तरह निर्लेप जीवन, समदृष्टि, और ईश्वर को स…🔊
- 6भगवद गीता अध्याय 6: आत्मसंयमयोग (ध्यानयोग) — ध्यान की विधि और मन का निग्रहगीता का छठा अध्याय, सभी 47 श्लोकों का भाव क्रम से: मनुष्य स्वयं अपना मित्र और शत्रु, ध्यान में कैसे बैठें, संयमित जीवन, चंचल मन को अभ्यास औ…🔊
- 7भगवद गीता अध्याय 7: ज्ञानविज्ञानयोग — सरल हिन्दी अर्थ और सारगीता का सातवाँ अध्याय, सभी 30 श्लोकों का भाव क्रम से: भगवान की अपरा और परा प्रकृति, माला के धागे की तरह सबमें ईश्वर, त्रिगुणमयी माया, और चा…🔊
- 8भगवद गीता अध्याय 8: अक्षरब्रह्मयोग — अन्तकाल का स्मरण, सरल अर्थगीता का आठवाँ अध्याय, सभी 28 श्लोकों का भाव क्रम से: अर्जुन के सात प्रश्न, अन्त समय का स्मरण, ओंकार और ध्यान, ब्रह्मा का दिन और रात, तथा शु…🔊
- 9भगवद गीता अध्याय 9: राजविद्याराजगुह्ययोग — पत्रं पुष्पं फलं तोयं, सरल अर्थगीता का नौवाँ अध्याय, सभी 34 श्लोकों का भाव क्रम से: राजविद्या, सब प्राणी ईश्वर में कैसे, ईश्वर जगत के माता-पिता, "योगक्षेमं वहाम्यहम्", पत…🔊
- 10भगवद गीता अध्याय 10: विभूतियोग — भगवान की विभूतियाँ, सरल अर्थगीता का दसवाँ अध्याय, सभी 42 श्लोकों का भाव क्रम से: भगवान सबके मूल, भक्त के हृदय में ज्ञान का दीपक, अर्जुन की स्तुति, और सूर्य, ओंकार से ल…🔊
- 11भगवद गीता अध्याय 11: विश्वरूपदर्शनयोग — विराट रूप का दर्शन, सरल अर्थगीता का ग्यारहवाँ अध्याय, सभी 55 श्लोकों का भाव क्रम से: अर्जुन विराट रूप देखना चाहते हैं, दिव्य दृष्टि पाते हैं, सारे लोक और काल में समाते…🔊
- 12भगवद गीता अध्याय 12: भक्तियोग — प्रिय भक्त के लक्षण, सम्पूर्ण सरल अर्थगीता का बारहवाँ अध्याय, सभी 20 श्लोकों का भाव क्रम से: साकार या निराकार उपासना, हर प्रकार के व्यक्ति के लिए साधना की सीढ़ी, और भगवान को प्र…🔊
- 13भगवद गीता अध्याय 13: क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग — शरीर और आत्मा, सरल अर्थगीता का तेरहवाँ अध्याय, सभी 34 श्लोकों का भाव क्रम से: शरीर क्षेत्र और आत्मा क्षेत्रज्ञ, सच्चे ज्ञान के बीस लक्षण, जानने योग्य परमात्मा, तथ…🔊
- 14भगवद गीता अध्याय 14: गुणत्रयविभागयोग — सत्त्व, रज, तम, सरल अर्थगीता का चौदहवाँ अध्याय, सभी 27 श्लोकों का भाव क्रम से: ईश्वर सबके पिता, सत्त्व, रज और तम कैसे बाँधते हैं, उनके लक्षण और फल, और तीनों गुणों…🔊
- 15भगवद गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तमयोग — सम्पूर्ण सरल हिन्दी अर्थगीता का पन्द्रहवाँ अध्याय, सभी 20 श्लोकों का भाव क्रम से: संसार रूपी उल्टा अश्वत्थ वृक्ष, वैराग्य से उसे काटना, जीव ईश्वर का सनातन अंश, भोज…🔊
- 16भगवद गीता अध्याय 16: दैवासुरसम्पद्विभागयोग — दैवी और आसुरी गुण, सरल अर्थगीता का सोलहवाँ अध्याय, सभी 24 श्लोकों का भाव क्रम से: 26 दैवी गुण, आसुरी स्वभाव के लक्षण, उसकी अन्तहीन कामनाएँ और परिणाम, नरक के तीन द्वार…🔊
- 17भगवद गीता अध्याय 17: श्रद्धात्रयविभागयोग — तीन प्रकार की श्रद्धा, आहार, तप और दानगीता का सत्रहवाँ अध्याय, सभी 28 श्लोकों का भाव क्रम से: तीन गुणों के अनुसार श्रद्धा, सात्त्विक, राजस और तामस आहार, यज्ञ, शरीर, वाणी और मन क…🔊
- 18भगवद गीता अध्याय 18: मोक्षसंन्यासयोग — सर्वधर्मान्परित्यज्य, गीता का निष्कर्षगीता का अठारहवाँ अध्याय, सभी 78 श्लोकों का भाव क्रम से: सच्चा त्याग, कर्म के पाँच कारण, तीन प्रकार के ज्ञान, कर्म, कर्ता, बुद्धि, धृति और स…🔊
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