श्रीराम जन्मभूमिअयोध्या · रामायण · यात्रा मार्गदर्शिका

रामायण

रामायण: श्रीराम की यात्रा के सात काण्ड

महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना लगभग 24,000 श्लोकों में की, जो सात काण्डों में बँटी है। ये काण्ड अयोध्या में श्रीराम के जन्म से लेकर वनवास, सीता की खोज, लंका के युद्ध और उस वापसी तक की कथा कहते हैं जिसे संसार आज भी दीपावली के रूप में मनाता है। नीचे हर काण्ड की कथा सरल शब्दों में, उसके निर्णायक क्षण और उससे मिलने वाली सीख दी गई है।

  1. 1

    बालकाण्ड: श्रीराम का जन्म और बाल्यकाल

    रामायण का पहला काण्ड: दशरथ का यज्ञ, अयोध्या में चारों राजकुमारों का जन्म, विश्वामित्र के साथ यात्रा और राम-सीता का विवाह।

    पढ़ें →
  2. 2

    अयोध्याकाण्ड: वचन और वनवास

    रामायण का दूसरा काण्ड: राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी के दो वर, सीता-लक्ष्मण सहित राम का वनवास, और भरत का राज्य लेने से इनकार।

    पढ़ें →
  3. 3

    अरण्यकाण्ड: वन के वर्ष

    रामायण का तीसरा काण्ड: दण्डक और पंचवटी का जीवन, शूर्पणखा, स्वर्ण मृग, रावण द्वारा सीता-हरण, जटायु और शबरी।

    पढ़ें →
  4. 4

    किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव से मैत्री

    रामायण का चौथा काण्ड: राम की हनुमान और सुग्रीव से भेंट, वालि का अन्त, वर्षा ऋतु की प्रतीक्षा और सीता की खोज में भेजे गए दल।

    पढ़ें →
  5. 5

    सुन्दरकाण्ड: हनुमान की लंका-यात्रा

    रामायण का पाँचवाँ और सबसे प्रिय काण्ड: हनुमान समुद्र लाँघते हैं, अशोक वाटिका में सीता को पाते हैं, लंका दहन करते हैं और संदेश लेकर लौटते हैं।

    पढ़ें →
  6. 6

    युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका का युद्ध

    रामायण का छठा काण्ड: विभीषण की शरणागति, समुद्र पर सेतु, कुम्भकर्ण, मेघनाद और रावण का अन्त, और अयोध्या वापसी।

    पढ़ें →
  7. 7

    उत्तरकाण्ड: रामराज्य और उसके बाद

    रामायण का सातवाँ काण्ड: राम का शासन, वाल्मीकि आश्रम में सीता, लव-कुश का जन्म, और सरयू तट पर राम का महाप्रस्थान।

    पढ़ें →