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अध्यात्म

विष्णु पुराण: सभी छह अंश सरल हिन्दी में

महर्षि पराशर द्वारा मैत्रेय को सुनाया गया विष्णु पुराण, छह अंशों में: सृष्टि, ध्रुव और प्रह्लाद, पृथ्वी और लोक, सूर्य और चन्द्र वंश, श्रीकृष्ण चरित और कलियुग व प्रलय।

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विष्णु पुराण अठारह महापुराणों में तीसरा माना जाता है और सबसे प्राचीन व सुव्यवस्थित पुराणों में गिना जाता है। इसके वक्ता महर्षि पराशर हैं, जो वेदव्यास जी के पिता थे। उनके शिष्य मैत्रेय ने पूछा कि यह संसार कहाँ से आया, किसमें स्थित है और किसमें लीन होता है। उत्तर में पराशर जी ने बताया कि यह सारा जगत भगवान विष्णु से उत्पन्न हुआ, उन्हीं में स्थित है और उन्हीं में लीन होता है।

पुराण के पाँच लक्षण माने गए हैं: सर्ग (सृष्टि), प्रतिसर्ग (प्रलय और पुनः सृष्टि), वंश, मन्वन्तर और वंशानुचरित। विष्णु पुराण में ये पाँचों पूरी तरह मिलते हैं, इसलिए इसे पुराणों का आदर्श रूप भी कहा जाता है।

छह अंश

  • प्रथम अंश (22 अध्याय): सृष्टि की रचना, समुद्र मन्थन, ध्रुव की तपस्या, राजा पृथु, प्रचेता और भक्त प्रह्लाद।
  • द्वितीय अंश (16 अध्याय): पृथ्वी के सात द्वीप और सात समुद्र, भारतवर्ष, पाताल और नरक, सूर्य का रथ और ग्रह, जड़भरत की कथा।
  • तृतीय अंश (18 अध्याय): मन्वन्तर, वेदों का विभाजन और व्यास परम्परा, वर्णाश्रम धर्म, श्राद्ध और सदाचार।
  • चतुर्थ अंश (24 अध्याय): सूर्यवंश (इक्ष्वाकु से श्रीराम और आगे) और चन्द्रवंश (पुरूरवा, ययाति, यदु, पुरु), तथा कलियुग के राजवंश।
  • पंचम अंश (38 अध्याय): श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण चरित: जन्म, गोकुल-वृन्दावन, कंस वध, द्वारका, और अन्त में परमधाम गमन।
  • षष्ठ अंश (8 अध्याय): कलियुग का स्वरूप, चार प्रकार के प्रलय, खाण्डिक्य और केशिध्वज का संवाद, और योग-ज्ञान।

आम प्रश्न

विष्णु पुराण किसने सुनाया?

महर्षि पराशर ने अपने शिष्य मैत्रेय को सुनाया। पराशर जी को यह ज्ञान महर्षि पुलस्त्य और वसिष्ठ जी के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ।

विष्णु पुराण में कितने अंश और अध्याय हैं?

छह अंश और 126 अध्याय (22 + 16 + 18 + 24 + 38 + 8)।

विष्णु पुराण का पाठ कब करें?

एकादशी, गुरुवार, पुरुषोत्तम (अधिक) मास और कार्तिक मास में इसका पाठ विशेष पुण्यदायी माना गया है, पर श्रद्धा से कभी भी पढ़ा जा सकता है।

सभी अध्याय: पढ़ें और सुनें

  1. 1विष्णु पुराण प्रथम अंश: सृष्टि, समुद्र मन्थन, ध्रुव चरित और प्रह्लाद कथाविष्णु पुराण का पहला अंश (22 अध्याय): मैत्रेय का प्रश्न, पराशर जी को पुराण कैसे मिला, विष्णु से सृष्टि, वराह अवतार, लक्ष्मी और समुद्र मन्थन…
  2. 2विष्णु पुराण द्वितीय अंश: सात द्वीप, भारतवर्ष की महिमा, सूर्य-रथ और जड़भरतविष्णु पुराण का दूसरा अंश (16 अध्याय): सात द्वीप और सात समुद्र, भारतवर्ष की महिमा, पाताल और नरक, सूर्य का रथ और ग्रह, जड़भरत की कथा और ऋभु-…
  3. 3विष्णु पुराण तृतीय अंश: मन्वन्तर, वेद विभाजन, वर्णाश्रम धर्म, सदाचार और श्राद्धविष्णु पुराण का तीसरा अंश (18 अध्याय): चौदह मनु, व्यास परम्परा और वेदों का विभाजन, यमराज का अपने दूतों को उपदेश, आश्रम धर्म, सदाचार और श्रा…
  4. 4विष्णु पुराण चतुर्थ अंश: सूर्यवंश और चन्द्रवंश — इक्ष्वाकु से श्रीराम तक, ययाति, यदु और पुरुविष्णु पुराण का चौथा अंश (24 अध्याय): इक्ष्वाकु से मान्धाता, हरिश्चन्द्र, सगर, भगीरथ, रघु और श्रीराम तक अयोध्या का सूर्यवंश, पुरूरवा, ययाति…
  5. 5विष्णु पुराण पंचम अंश: सम्पूर्ण श्रीकृष्ण चरित — जन्म से परमधाम गमन तकविष्णु पुराण का पाँचवाँ अंश (38 अध्याय), श्रीकृष्ण का जीवन: कंस के कारागार में जन्म, गोकुल-वृन्दावन की बाल लीलाएँ, गोवर्धन और रास, कंस वध,…
  6. 6विष्णु पुराण षष्ठ अंश: कलियुग, चार प्रकार के प्रलय, केशिध्वज-खाण्डिक्य संवाद और मोक्षविष्णु पुराण का अन्तिम अंश (8 अध्याय): कलियुग के लक्षण और कलियुग सबसे सरल क्यों, चार प्रकार के प्रलय, तीन प्रकार के दुःख, योग पर खाण्डिक्य-…

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