हनुमान: जीवन, कथाएँ और राम-भक्ति
अंजना और केसरी के पुत्र हनुमान: जन्म, लंका-यात्रा, संजीवनी पर्वत, अयोध्या में उनके दर्शन पहले क्यों होते हैं, और उनसे मिलने वाली सीख।
पात्र
रामायण का हर पात्र किसी एक गुण की पराकाष्ठा दिखाता है: सीता की दृढ़ता, लक्ष्मण की सेवा, भरत का त्याग, हनुमान की भक्ति, शबरी का धैर्य, जटायु का साहस और अहंकार से नष्ट हुई रावण की विद्वत्ता। इन्हें साथ-साथ पढ़ना यह समझने का सबसे सरल मार्ग है कि यह महाकाव्य पीढ़ियों से परिवारों का मार्गदर्शन क्यों करता आया है।
अंजना और केसरी के पुत्र हनुमान: जन्म, लंका-यात्रा, संजीवनी पर्वत, अयोध्या में उनके दर्शन पहले क्यों होते हैं, और उनसे मिलने वाली सीख।
राजा जनक को हल की रेखा में मिलीं, श्रीराम की पत्नी सीता: जन्म, विवाह, वनवास, लंका में बन्दी जीवन, पुत्र, और वे लक्ष्मी-स्वरूपा क्यों पूजी जाती हैं।
सुमित्रानन्दन लक्ष्मण श्रीराम के साथ वन गए, चौदह वर्ष उनकी रक्षा की और मेघनाद का वध किया। उनका जीवन, स्वभाव और निष्ठा।
कैकेयी-पुत्र भरत को अयोध्या मिली और उन्होंने लौटा दी। चौदह वर्ष उन्होंने नन्दीग्राम से श्रीराम की पादुकाओं के नाम पर शासन किया।
दशरथ के सबसे छोटे पुत्र शत्रुघ्न ने भरत की सेवा की, वनवास काल में अयोध्या सँभाली, लवणासुर का वध किया और मथुरा नगरी बसाई।
रावण के भाई विभीषण ने सीता को लौटाने की सलाह दी, निकाले गए, श्रीराम की शरण ली और लंका के धर्मनिष्ठ राजा बने।
दशरथ के मित्र, वृद्ध गिद्धराज जटायु ने सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध किया और श्रीराम की गोद में प्राण त्यागे। असम्भव के विरुद्ध साहस की कथा।
वृद्धा वनवासी भक्त शबरी ने दशकों अपने आश्रम में श्रीराम की प्रतीक्षा की और उन्हें बेर अर्पित किए। उनकी कथा और नवधा भक्ति।
लंका का दशानन राजा रावण: विद्वान, संगीतज्ञ और शिव-भक्त, जिसकी वासना और अहंकार ने उसके कुल और स्वर्ण-नगरी का नाश किया।
रामायण के रचयिता और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि: शोक से पहला श्लोक कैसे जन्मा, और कथा के भीतर उनकी अपनी भूमिका।