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श्रीराम जन्मभूमि प्रतीकश्रीराम जन्मभूमिअयोध्या · रामायण · यात्रा मार्गदर्शिका

पंचांग · अयोध्या

पंचांग, 1 जून 2026

सोमवार · प्रतिपदा, कृष्ण पक्ष · आषाढ़ मास · विक्रम संवत् 2083

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तिथिप्रतिपदा (कृष्ण पक्ष) तक 16:38, फिर द्वितीया
नक्षत्रज्येष्ठा (चरण 2) तक 19:08, फिर मूल
योगसिद्ध तक 06:17
करण (सूर्योदय पर)कौलव
वारसोमवार
चन्द्र राशिवृश्चिक, में प्रवेश धनु 19:08
सूर्य राशिवृषभ
सूर्योदय / सूर्यास्त05:07 / 18:50
मास (पूर्णिमान्त)आषाढ़ · अमान्त: ज्येष्ठ
अयनांश (लाहिड़ी)24° 13'

शुभ और अशुभ समय

अभिजीत मुहूर्त11:31–12:26
राहुकाल06:50–08:33
यमगण्ड10:16–11:59
गुलिक काल13:41–15:24

तीक्ष्ण नक्षत्र: झगड़ों और नए उद्यम से बचें; शोध और बुरी आदतें छोड़ने के लिए अच्छा।

चौघड़िया

दिन
अमृत05:07–06:50
काल06:50–08:33
शुभ08:33–10:16
रोग10:16–11:59
उद्वेग11:59–13:41
चर13:41–15:24
लाभ15:24–17:07
अमृत17:07–18:50
रात
चर18:50–20:07
रोग20:07–21:24
काल21:24–22:41
लाभ22:41–23:59
उद्वेग23:59–01:16
शुभ01:16–02:33
अमृत02:33–03:50
चर03:50–05:07

पंचांग के पाँच अंग

  • तिथि: चान्द्र दिवस, सूर्य से चन्द्रमा की दूरी के हर 12 अंश पर; एक चान्द्र मास में 30।
  • वार: सप्ताह का दिन, सूर्योदय से सूर्योदय तक।
  • नक्षत्र: चन्द्रमा जिस नक्षत्र में है, 13°20' के 27 भागों में से एक।
  • योग: सूर्य और चन्द्रमा के भोगांश के योग से; कुल 27।
  • करण: आधी तिथि; शुभ कार्यों में विष्टि (भद्रा) टाली जाती है।

आम प्रश्न

राहुकाल क्या है?

राहुकाल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) के आठ बराबर भागों में से एक है, जो वार के अनुसार तय होता है। परम्परा में इसमें नया और शुभ काम आरम्भ नहीं किया जाता।

पंचांग शहर के अनुसार अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त स्थान के साथ बदलते हैं, और दिन की तिथि व नक्षत्र स्थानीय सूर्योदय पर लिए जाते हैं; राहुकाल और चौघड़िया भी स्थानीय सूर्योदय से गिने जाते हैं।

चौघड़िया क्या है?

दिन और रात, दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है जिन्हें चौघड़िया कहते हैं। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे, चर यात्रा के लिए अच्छा, और उद्वेग, काल व रोग महत्त्वपूर्ण कामों के लिए टाले जाते हैं।

ज्योतिष चिन्तन के लिए एक पारम्परिक मार्गदर्शन है, निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, धन, कानूनी या विवाह सम्बन्धी निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञों और पूरी कुण्डली देखने वाले विद्वान ज्योतिषी से सलाह लें। गणना: लाहिड़ी अयनांश; चन्द्रमा और ग्रह मानक खगोलीय सूत्रों से।