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श्रीराम जन्मभूमि प्रतीकश्रीराम जन्मभूमिअयोध्या · रामायण · यात्रा मार्गदर्शिका

पंचांग · अयोध्या

पंचांग, 4 अक्टूबर 2026

रविवार · नवमी, कृष्ण पक्ष · आश्विन मास · विक्रम संवत् 2083

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तिथिनवमी (कृष्ण पक्ष) तक 03:54 (अगले दिन), फिर दशमी
नक्षत्रपुनर्वसु (चरण 1) तक 00:13, फिर पुष्य
योगपरिघ तक 12:31
करण (सूर्योदय पर)तैतिल
वाररविवार
चन्द्र राशिमिथुन, में प्रवेश कर्क 18:31
सूर्य राशिकन्या
सूर्योदय / सूर्यास्त05:54 / 17:45
मास (पूर्णिमान्त)आश्विन · अमान्त: भाद्रपद
अयनांश (लाहिड़ी)24° 13'

शुभ और अशुभ समय

अभिजीत मुहूर्त11:26–12:13
राहुकाल16:16–17:45
यमगण्ड11:49–13:18
गुलिक काल14:47–16:16

चर नक्षत्र: यात्रा, वाहन, सफ़र की शुरुआत और बदलाव के लिए अच्छा।

चौघड़िया

दिन
उद्वेग05:54–07:23
चर07:23–08:52
लाभ08:52–10:21
अमृत10:21–11:49
काल11:49–13:18
शुभ13:18–14:47
रोग14:47–16:16
उद्वेग16:16–17:45
रात
शुभ17:45–19:16
अमृत19:16–20:47
चर20:47–22:18
रोग22:18–23:50
काल23:50–01:21
लाभ01:21–02:52
उद्वेग02:52–04:23
शुभ04:23–05:55

पंचांग के पाँच अंग

  • तिथि: चान्द्र दिवस, सूर्य से चन्द्रमा की दूरी के हर 12 अंश पर; एक चान्द्र मास में 30।
  • वार: सप्ताह का दिन, सूर्योदय से सूर्योदय तक।
  • नक्षत्र: चन्द्रमा जिस नक्षत्र में है, 13°20' के 27 भागों में से एक।
  • योग: सूर्य और चन्द्रमा के भोगांश के योग से; कुल 27।
  • करण: आधी तिथि; शुभ कार्यों में विष्टि (भद्रा) टाली जाती है।

आम प्रश्न

राहुकाल क्या है?

राहुकाल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) के आठ बराबर भागों में से एक है, जो वार के अनुसार तय होता है। परम्परा में इसमें नया और शुभ काम आरम्भ नहीं किया जाता।

पंचांग शहर के अनुसार अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त स्थान के साथ बदलते हैं, और दिन की तिथि व नक्षत्र स्थानीय सूर्योदय पर लिए जाते हैं; राहुकाल और चौघड़िया भी स्थानीय सूर्योदय से गिने जाते हैं।

चौघड़िया क्या है?

दिन और रात, दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है जिन्हें चौघड़िया कहते हैं। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे, चर यात्रा के लिए अच्छा, और उद्वेग, काल व रोग महत्त्वपूर्ण कामों के लिए टाले जाते हैं।

ज्योतिष चिन्तन के लिए एक पारम्परिक मार्गदर्शन है, निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, धन, कानूनी या विवाह सम्बन्धी निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञों और पूरी कुण्डली देखने वाले विद्वान ज्योतिषी से सलाह लें। गणना: लाहिड़ी अयनांश; चन्द्रमा और ग्रह मानक खगोलीय सूत्रों से।