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श्रीराम जन्मभूमि प्रतीकश्रीराम जन्मभूमिअयोध्या · रामायण · यात्रा मार्गदर्शिका

पंचांग · अयोध्या

पंचांग, 13 जनवरी 2027

बुधवार · पंचमी, शुक्ल पक्ष · पौष मास · विक्रम संवत् 2083

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तिथिपंचमी (शुक्ल पक्ष) तक 13:02, फिर षष्ठी
नक्षत्रपूर्वा भाद्रपद (चरण 2) तक 22:04, फिर उत्तरा भाद्रपद
योगवरीयान तक 17:52
करण (सूर्योदय पर)बालव
वारबुधवार
चन्द्र राशिकुम्भ, में प्रवेश मीन 15:39
सूर्य राशिधनु
सूर्योदय / सूर्यास्त06:51 / 17:27
मास (पूर्णिमान्त)पौष · अमान्त: पौष
अयनांश (लाहिड़ी)24° 13'

शुभ और अशुभ समय

अभिजीत मुहूर्त11:48–12:30
राहुकाल12:09–13:28
यमगण्ड08:10–09:30
गुलिक काल10:49–12:09

उग्र नक्षत्र: शुभ कार्यों की शुरुआत से बचें; साहस और कठिन कामों के लिए उपयुक्त।

चौघड़िया

दिन
लाभ06:51–08:10
अमृत08:10–09:30
काल09:30–10:49
शुभ10:49–12:09
रोग12:09–13:28
उद्वेग13:28–14:48
चर14:48–16:07
लाभ16:07–17:27
रात
उद्वेग17:27–19:07
शुभ19:07–20:48
अमृत20:48–22:28
चर22:28–00:09
रोग00:09–01:49
काल01:49–03:30
लाभ03:30–05:10
उद्वेग05:10–06:51

पंचांग के पाँच अंग

  • तिथि: चान्द्र दिवस, सूर्य से चन्द्रमा की दूरी के हर 12 अंश पर; एक चान्द्र मास में 30।
  • वार: सप्ताह का दिन, सूर्योदय से सूर्योदय तक।
  • नक्षत्र: चन्द्रमा जिस नक्षत्र में है, 13°20' के 27 भागों में से एक।
  • योग: सूर्य और चन्द्रमा के भोगांश के योग से; कुल 27।
  • करण: आधी तिथि; शुभ कार्यों में विष्टि (भद्रा) टाली जाती है।

आम प्रश्न

राहुकाल क्या है?

राहुकाल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) के आठ बराबर भागों में से एक है, जो वार के अनुसार तय होता है। परम्परा में इसमें नया और शुभ काम आरम्भ नहीं किया जाता।

पंचांग शहर के अनुसार अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त स्थान के साथ बदलते हैं, और दिन की तिथि व नक्षत्र स्थानीय सूर्योदय पर लिए जाते हैं; राहुकाल और चौघड़िया भी स्थानीय सूर्योदय से गिने जाते हैं।

चौघड़िया क्या है?

दिन और रात, दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है जिन्हें चौघड़िया कहते हैं। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे, चर यात्रा के लिए अच्छा, और उद्वेग, काल व रोग महत्त्वपूर्ण कामों के लिए टाले जाते हैं।

ज्योतिष चिन्तन के लिए एक पारम्परिक मार्गदर्शन है, निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, धन, कानूनी या विवाह सम्बन्धी निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञों और पूरी कुण्डली देखने वाले विद्वान ज्योतिषी से सलाह लें। गणना: लाहिड़ी अयनांश; चन्द्रमा और ग्रह मानक खगोलीय सूत्रों से।