पंचांग · अयोध्या
पंचांग, 12 मार्च 2027
शुक्रवार · चतुर्थी, शुक्ल पक्ष · फाल्गुन मास · विक्रम संवत् 2083
| तिथि | चतुर्थी (शुक्ल पक्ष) तक 14:57, फिर पंचमी |
|---|---|
| नक्षत्र | अश्विनी (चरण 4) तक 11:22, फिर भरणी |
| योग | इन्द्र तक 21:33 |
| करण (सूर्योदय पर) | विष्टि (भद्रा) |
| वार | शुक्रवार |
| चन्द्र राशि | मेष |
| सूर्य राशि | कुम्भ |
| सूर्योदय / सूर्यास्त | 06:14 / 18:07 |
| मास (पूर्णिमान्त) | फाल्गुन · अमान्त: फाल्गुन |
| अयनांश (लाहिड़ी) | 24° 13' |
शुभ और अशुभ समय
| अभिजीत मुहूर्त | 11:47–12:35 |
|---|---|
| राहुकाल | 10:42–12:11 |
| यमगण्ड | 15:09–16:38 |
| गुलिक काल | 07:43–09:13 |
क्षिप्र नक्षत्र: व्यापार, पढ़ाई, औषधि, जल्दी होने वाले काम और छोटी यात्रा के लिए अच्छा।
चौघड़िया
| दिन | |
|---|---|
| चर | 06:14–07:43 |
| लाभ | 07:43–09:13 |
| अमृत | 09:13–10:42 |
| काल | 10:42–12:11 |
| शुभ | 12:11–13:40 |
| रोग | 13:40–15:09 |
| उद्वेग | 15:09–16:38 |
| चर | 16:38–18:07 |
| रात | |
|---|---|
| रोग | 18:07–19:38 |
| काल | 19:38–21:09 |
| लाभ | 21:09–22:39 |
| उद्वेग | 22:39–00:10 |
| शुभ | 00:10–01:41 |
| अमृत | 01:41–03:12 |
| चर | 03:12–04:42 |
| रोग | 04:42–06:13 |
पंचांग के पाँच अंग
- तिथि: चान्द्र दिवस, सूर्य से चन्द्रमा की दूरी के हर 12 अंश पर; एक चान्द्र मास में 30।
- वार: सप्ताह का दिन, सूर्योदय से सूर्योदय तक।
- नक्षत्र: चन्द्रमा जिस नक्षत्र में है, 13°20' के 27 भागों में से एक।
- योग: सूर्य और चन्द्रमा के भोगांश के योग से; कुल 27।
- करण: आधी तिथि; शुभ कार्यों में विष्टि (भद्रा) टाली जाती है।
आम प्रश्न
राहुकाल क्या है?
राहुकाल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) के आठ बराबर भागों में से एक है, जो वार के अनुसार तय होता है। परम्परा में इसमें नया और शुभ काम आरम्भ नहीं किया जाता।
पंचांग शहर के अनुसार अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और सूर्यास्त स्थान के साथ बदलते हैं, और दिन की तिथि व नक्षत्र स्थानीय सूर्योदय पर लिए जाते हैं; राहुकाल और चौघड़िया भी स्थानीय सूर्योदय से गिने जाते हैं।
चौघड़िया क्या है?
दिन और रात, दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है जिन्हें चौघड़िया कहते हैं। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे, चर यात्रा के लिए अच्छा, और उद्वेग, काल व रोग महत्त्वपूर्ण कामों के लिए टाले जाते हैं।
ज्योतिष चिन्तन के लिए एक पारम्परिक मार्गदर्शन है, निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, धन, कानूनी या विवाह सम्बन्धी निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञों और पूरी कुण्डली देखने वाले विद्वान ज्योतिषी से सलाह लें। गणना: लाहिड़ी अयनांश; चन्द्रमा और ग्रह मानक खगोलीय सूत्रों से।