पंचांग · अयोध्या
पंचांग, 7 अप्रैल 2027
बुधवार · प्रतिपदा, शुक्ल पक्ष · चैत्र मास · विक्रम संवत् 2084
| तिथि | प्रतिपदा (शुक्ल पक्ष) तक 04:29 (अगले दिन), फिर द्वितीया |
|---|---|
| नक्षत्र | रेवती (चरण 2) तक 18:25, फिर अश्विनी |
| योग | इन्द्र तक 07:25 |
| करण (सूर्योदय पर) | किंस्तुघ्न |
| वार | बुधवार |
| चन्द्र राशि | मीन, में प्रवेश मेष 18:25 |
| सूर्य राशि | मीन |
| सूर्योदय / सूर्यास्त | 05:46 / 18:20 |
| मास (पूर्णिमान्त) | चैत्र · अमान्त: चैत्र |
| अयनांश (लाहिड़ी) | 24° 14' |
शुभ और अशुभ समय
| अभिजीत मुहूर्त | 11:38–12:28 |
|---|---|
| राहुकाल | 12:03–13:37 |
| यमगण्ड | 07:20–08:54 |
| गुलिक काल | 10:29–12:03 |
मृदु नक्षत्र: कला, संगीत, मित्रता, नए वस्त्र और प्रेम सम्बन्धी कामों के लिए अच्छा।
चौघड़िया
| दिन | |
|---|---|
| लाभ | 05:46–07:20 |
| अमृत | 07:20–08:54 |
| काल | 08:54–10:29 |
| शुभ | 10:29–12:03 |
| रोग | 12:03–13:37 |
| उद्वेग | 13:37–15:11 |
| चर | 15:11–16:46 |
| लाभ | 16:46–18:20 |
| रात | |
|---|---|
| उद्वेग | 18:20–19:46 |
| शुभ | 19:46–21:11 |
| अमृत | 21:11–22:37 |
| चर | 22:37–00:02 |
| रोग | 00:02–01:28 |
| काल | 01:28–02:53 |
| लाभ | 02:53–04:19 |
| उद्वेग | 04:19–05:45 |
पंचांग के पाँच अंग
- तिथि: चान्द्र दिवस, सूर्य से चन्द्रमा की दूरी के हर 12 अंश पर; एक चान्द्र मास में 30।
- वार: सप्ताह का दिन, सूर्योदय से सूर्योदय तक।
- नक्षत्र: चन्द्रमा जिस नक्षत्र में है, 13°20' के 27 भागों में से एक।
- योग: सूर्य और चन्द्रमा के भोगांश के योग से; कुल 27।
- करण: आधी तिथि; शुभ कार्यों में विष्टि (भद्रा) टाली जाती है।
आम प्रश्न
राहुकाल क्या है?
राहुकाल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) के आठ बराबर भागों में से एक है, जो वार के अनुसार तय होता है। परम्परा में इसमें नया और शुभ काम आरम्भ नहीं किया जाता।
पंचांग शहर के अनुसार अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और सूर्यास्त स्थान के साथ बदलते हैं, और दिन की तिथि व नक्षत्र स्थानीय सूर्योदय पर लिए जाते हैं; राहुकाल और चौघड़िया भी स्थानीय सूर्योदय से गिने जाते हैं।
चौघड़िया क्या है?
दिन और रात, दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है जिन्हें चौघड़िया कहते हैं। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे, चर यात्रा के लिए अच्छा, और उद्वेग, काल व रोग महत्त्वपूर्ण कामों के लिए टाले जाते हैं।
ज्योतिष चिन्तन के लिए एक पारम्परिक मार्गदर्शन है, निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, धन, कानूनी या विवाह सम्बन्धी निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञों और पूरी कुण्डली देखने वाले विद्वान ज्योतिषी से सलाह लें। गणना: लाहिड़ी अयनांश; चन्द्रमा और ग्रह मानक खगोलीय सूत्रों से।