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श्रीराम जन्मभूमि प्रतीकश्रीराम जन्मभूमिअयोध्या · रामायण · यात्रा मार्गदर्शिका

पंचांग · अयोध्या

पंचांग, 15 अक्टूबर 2027

शुक्रवार · पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष · आश्विन मास · विक्रम संवत् 2084

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तिथिपूर्णिमा (शुक्ल पक्ष) तक 19:17, फिर प्रतिपदा
नक्षत्ररेवती (चरण 2) तक 23:28, फिर अश्विनी
योगव्याघात तक 15:33
करण (सूर्योदय पर)विष्टि (भद्रा)
वारशुक्रवार
चन्द्र राशिमीन, में प्रवेश मेष 23:28
सूर्य राशिकन्या
सूर्योदय / सूर्यास्त06:00 / 17:33
मास (पूर्णिमान्त)आश्विन · अमान्त: आश्विन
अयनांश (लाहिड़ी)24° 14'

शुभ और अशुभ समय

अभिजीत मुहूर्त11:23–12:10
राहुकाल10:20–11:46
यमगण्ड14:40–16:07
गुलिक काल07:26–08:53

मृदु नक्षत्र: कला, संगीत, मित्रता, नए वस्त्र और प्रेम सम्बन्धी कामों के लिए अच्छा।

चौघड़िया

दिन
चर06:00–07:26
लाभ07:26–08:53
अमृत08:53–10:20
काल10:20–11:46
शुभ11:46–13:13
रोग13:13–14:40
उद्वेग14:40–16:07
चर16:07–17:33
रात
रोग17:33–19:07
काल19:07–20:40
लाभ20:40–22:13
उद्वेग22:13–23:47
शुभ23:47–01:20
अमृत01:20–02:53
चर02:53–04:27
रोग04:27–06:00

पंचांग के पाँच अंग

  • तिथि: चान्द्र दिवस, सूर्य से चन्द्रमा की दूरी के हर 12 अंश पर; एक चान्द्र मास में 30।
  • वार: सप्ताह का दिन, सूर्योदय से सूर्योदय तक।
  • नक्षत्र: चन्द्रमा जिस नक्षत्र में है, 13°20' के 27 भागों में से एक।
  • योग: सूर्य और चन्द्रमा के भोगांश के योग से; कुल 27।
  • करण: आधी तिथि; शुभ कार्यों में विष्टि (भद्रा) टाली जाती है।

आम प्रश्न

राहुकाल क्या है?

राहुकाल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) के आठ बराबर भागों में से एक है, जो वार के अनुसार तय होता है। परम्परा में इसमें नया और शुभ काम आरम्भ नहीं किया जाता।

पंचांग शहर के अनुसार अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और सूर्यास्त स्थान के साथ बदलते हैं, और दिन की तिथि व नक्षत्र स्थानीय सूर्योदय पर लिए जाते हैं; राहुकाल और चौघड़िया भी स्थानीय सूर्योदय से गिने जाते हैं।

चौघड़िया क्या है?

दिन और रात, दोनों को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है जिन्हें चौघड़िया कहते हैं। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे, चर यात्रा के लिए अच्छा, और उद्वेग, काल व रोग महत्त्वपूर्ण कामों के लिए टाले जाते हैं।

ज्योतिष चिन्तन के लिए एक पारम्परिक मार्गदर्शन है, निश्चितता नहीं। स्वास्थ्य, धन, कानूनी या विवाह सम्बन्धी निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञों और पूरी कुण्डली देखने वाले विद्वान ज्योतिषी से सलाह लें। गणना: लाहिड़ी अयनांश; चन्द्रमा और ग्रह मानक खगोलीय सूत्रों से।