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अध्यात्म

श्री सत्यनारायण व्रत कथा: पाँचों अध्याय और पूजा विधि

स्कन्द पुराण की सम्पूर्ण सत्यनारायण व्रत कथा पाँच अध्यायों में: निर्धन ब्राह्मण, लकड़हारा, राजा उल्कामुख, साधु वैश्य और कलावती, तथा राजा तुंगध्वज की कथा, पूजा विधि सहित।

चित्रण: श्री सत्यनारायण व्रत कथा: पाँचों अध्याय और पूजा विधि
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श्री सत्यनारायण व्रत कथा हिन्दू घरों में सबसे अधिक की जाने वाली पूजा है: गृह प्रवेश, विवाह, जन्मदिन, नई नौकरी या पूर्णिमा पर। सत्यनारायण भगवान विष्णु का ही रूप हैं, और इस व्रत का सन्देश उसके नाम में है: सत्य ही नारायण है। कथा परम्परा से स्कन्द पुराण के रेवा खण्ड से मानी जाती है और इसके पाँच अध्याय हैं।

पूजा की सरल विधि

  • पूजा स्थान साफ़ करके चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ, केले के पत्तों या खम्भों से मण्डप बनाएँ।
  • चौकी पर कलश, और भगवान सत्यनारायण (विष्णु) का चित्र या शालग्राम रखें।
  • पहले गणेश जी, फिर नवग्रह और कलश का पूजन करें।
  • भगवान को पंचामृत से स्नान, चन्दन, फूल, तुलसी दल, धूप, दीप अर्पित करें।
  • प्रसाद में सवाया मात्रा में गेहूँ का आटा (या सूजी), घी, शक्कर और केला मिलाकर पंजीरी या शीरा बनाएँ।
  • पाँचों अध्याय की कथा पढ़ें या सुनें, फिर आरती करें और सबको प्रसाद बाँटें।
  • कथा में बार-बार आता है कि प्रसाद का अनादर न करें; प्रसाद अवश्य ग्रहण करें।

आम प्रश्न

सत्यनारायण कथा कब करें?

पूर्णिमा सबसे प्रचलित दिन है, पर किसी भी शुभ अवसर या मनोकामना पूर्ण होने पर, किसी भी दिन, विशेषकर सन्ध्या के समय की जा सकती है।

सत्यनारायण कथा में कितने अध्याय हैं?

पाँच अध्याय।

इस कथा की मुख्य सीख क्या है?

वचन देकर भूलना नहीं चाहिए, सत्य का पालन करना चाहिए, और भगवान के प्रसाद का अनादर नहीं करना चाहिए। निर्धन हो या राजा, श्रद्धा से व्रत करने वाले का कल्याण होता है।

सभी अध्याय: पढ़ें और सुनें

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