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अध्यात्म

गरुड़ पुराण: सरल हिन्दी में भाग-दर-भाग

गरुड़ पुराण शान्त और सरल भाषा में, क्रम से: गरुड़ जी के प्रश्न, मृत्यु के बाद जीव की यात्रा, कर्म और उनके फल, तेरह दिनों के संस्कार, दान का महत्त्व और मोक्ष का मार्ग।

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गरुड़ पुराण अठारह महापुराणों में से एक वैष्णव पुराण है, जिसमें भगवान विष्णु अपने वाहन गरुड़ जी के प्रश्नों का उत्तर देते हैं। इसके दो भाग हैं। पूर्व खण्ड (आचार काण्ड) में सृष्टि, अवतार, व्रत, तीर्थ, आयुर्वेद, रत्न-परीक्षा, नीति और धर्म का वर्णन है। उत्तर खण्ड, जिसे प्रेत खण्ड कहते हैं, में मृत्यु, मृत्यु के बाद जीव की यात्रा, कर्मों के फल, पितृ कर्म और मोक्ष का मार्ग बताया गया है।

परम्परा में किसी के देहान्त के बाद तेरह दिनों तक घर में गरुड़ पुराण (प्रेत खण्ड) सुना जाता है। इसका उद्देश्य डराना नहीं है। यह परिवार को सान्त्वना देता है कि जीवन मृत्यु पर समाप्त नहीं होता, दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए क्या करें, और जीवित लोगों को यह याद दिलाता है कि अच्छे कर्म, दान और भक्ति ही साथ जाते हैं।

इस संग्रह में

नीचे गरुड़ पुराण के प्रेत खण्ड का सार क्रम से छह भागों में दिया गया है, और पूर्व खण्ड की नीति और धर्म की मुख्य बातें एक भाग में। नरकों के वर्णन को यहाँ संयमित रखा गया है; उनका उद्देश्य बुरे कर्मों से बचाना है, भय फैलाना नहीं।

आम प्रश्न

क्या गरुड़ पुराण घर में रखना या पढ़ना अशुभ है?

नहीं। यह एक महापुराण है और इसे पढ़ना, रखना या सुनना अशुभ नहीं है। केवल परम्परा यह है कि प्रेत खण्ड का पाठ विशेष रूप से मृत्यु के बाद के दिनों में होता है।

गरुड़ पुराण तेरह दिन क्यों सुना जाता है?

माना जाता है कि इन दिनों में दिवंगत आत्मा अपने घर के पास रहती है। कथा श्रवण से उसे शान्ति मिलती है, और शोकग्रस्त परिवार को धैर्य और जीवन का अर्थ समझ आता है।

गरुड़ पुराण का मुख्य सन्देश क्या है?

जैसे कर्म, वैसा फल। सत्य, दया, दान, माता-पिता की सेवा और भगवान का स्मरण करने वाला व्यक्ति भय रहित होकर उत्तम गति पाता है।

सभी अध्याय: पढ़ें और सुनें

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