महर्षि वाल्मीकि: आदिकवि
रामायण के रचयिता और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि: शोक से पहला श्लोक कैसे जन्मा, और कथा के भीतर उनकी अपनी भूमिका।
वे कौन हैं
महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण की रचना की, लगभग 24,000 श्लोकों में, सात काण्डों में। वे आदिकवि कहलाते हैं और उनका काव्य आदिकाव्य। बाद की हर रामायण, चाहे अवधी में तुलसीदास की रामचरितमानस हो, तमिल में कम्बन की या बांग्ला में कृत्तिवास की, उन्हीं से निकली है।
डाकू जो ऋषि बना
प्रचलित परम्परा कहती है कि वे पहले रत्नाकर नाम के डाकू थे, जो लूट से परिवार पालते थे। देवर्षि नारद ने पूछा कि जो परिवार तुम्हारी कमाई में भागी है, क्या वह तुम्हारे पाप में भी भागी होगा? उन्होंने घर जाकर पूछा; सबने मना कर दिया। विचलित होकर वे लौटे और मार्ग माँगा। नारद ने राम-नाम जपने को दिया। वे इतने समय तक ध्यान में बैठे कि उन पर दीमक की बाँबी (वल्मीक) जम गई, और जब निकले तो वाल्मीकि कहलाए।
पहला श्लोक
रामायण का आरम्भ ही वाल्मीकि के इस प्रश्न से होता है कि क्या संसार में कोई ऐसा पुरुष है जो सचमुच गुणवान, सत्यवादी, वीर और संयमी हो। नारद उन्हें राम के विषय में बताते हैं। कुछ समय बाद तमसा तट पर वाल्मीकि देखते हैं कि एक व्याध प्रेमरत क्रौंच-युगल में से एक को मार देता है, और बचे हुए पक्षी का विलाप सुनते हैं। उनके भीतर शोक उठता है और शाप के रूप में एक पूर्ण छन्दबद्ध श्लोक बनकर निकलता है। ब्रह्मा प्रकट होकर कहते हैं कि यह छन्द एक उद्देश्य से जन्मा है: राम का चरित कहने के लिए।
अपनी ही कथा के भीतर
वाल्मीकि पात्र भी हैं। उन्होंने त्यागी गई सीता को आश्रय दिया, लव-कुश को पाला, उन्हें काव्य सिखाया और राम की सभा में खड़े होकर सीता की साक्षी दी। देखें उत्तरकाण्ड।
उनसे सीख
किसी का अतीत उसे अयोग्य नहीं बनाता। राहगीरों को लूटने वाला व्यक्ति एक सभ्यता के लिए धर्म की वाणी बना, और परम्परा ने कभी नहीं छिपाया कि वह कहाँ से चला था। उनका पहला श्लोक भी सिखाता है: भारत का सबसे महान काव्य एक पक्षी के प्रति करुणा से आरम्भ हुआ।
वाल्मीकि जयन्ती आश्विन पूर्णिमा को मनाई जाती है। अयोध्या का हवाई अड्डा उन्हीं के नाम पर है: महर्षि वाल्मीकि अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अयोध्या धाम। उनका दिया काव्य पढ़ें: सात काण्डों में रामायण।
अंतिम अद्यतन:
आगे पढ़ें
अरण्यकाण्ड: वन के वर्ष
रामायण का तीसरा काण्ड: दण्डक और पंचवटी का जीवन, शूर्पणखा, स्वर्ण मृग, रावण द्वारा सीता-हरण, जटायु और शबरी।
सुन्दरकाण्ड: हनुमान की लंका-यात्रा
रामायण का पाँचवाँ और सबसे प्रिय काण्ड: हनुमान समुद्र लाँघते हैं, अशोक वाटिका में सीता को पाते हैं, लंका दहन करते हैं और संदेश लेकर लौटते हैं।
उत्तरकाण्ड: रामराज्य और उसके बाद
रामायण का सातवाँ काण्ड: राम का शासन, वाल्मीकि आश्रम में सीता, लव-कुश का जन्म, और सरयू तट पर राम का महाप्रस्थान।
इक्ष्वाकु: सूर्यवंश के संस्थापक
वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु अयोध्या के प्रथम राजा और उस सूर्यवंश के संस्थापक माने जाते हैं जिसमें श्रीराम का जन्म हुआ।
राजा दिलीप और नन्दिनी की सेवा
अयोध्या के राजा दिलीप ने सेवक की भाँति नन्दिनी गाय की सेवा की और उसे बचाने के लिए सिंह को अपना शरीर अर्पित किया। कालिदास वर्णित रघु के पिता।
अज और इन्दुमती: श्रीराम के पितामह
रघु के पुत्र और दशरथ के पिता राजा अज ने स्वयंवर में इन्दुमती को पाया और एक गिरती माला से उन्हें खो दिया। प्रेम, शोक और कर्तव्य की कथा।