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रामायण

उत्तरकाण्ड: रामराज्य और उसके बाद

रामायण का सातवाँ काण्ड: राम का शासन, वाल्मीकि आश्रम में सीता, लव-कुश का जन्म, और सरयू तट पर राम का महाप्रस्थान।

कथा

उत्तरकाण्ड के आरम्भ में ऋषिगण अभिषिक्त राजा के पास आकर रावण का पूर्व इतिहास और हनुमान के बाल्यकाल की कथा सुनाते हैं। फिर रामराज्य का वर्णन है, वह शासन जो भारत में सुशासन की कसौटी बन गया।

इसके बाद सबसे कठिन प्रसंग आता है। राम को ज्ञात होता है कि कुछ नागरिक प्रश्न उठा रहे हैं कि जो रानी पराए नगर में रही, वह सिंहासन पर कैसे बैठे। सीता को निर्दोष जानते हुए भी राम सिंहासन पर प्रजा के विश्वास को अपने सुख से ऊपर रखते हैं, और गर्भवती सीता को वन में छोड़ दिया जाता है। वे महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शरण पाती हैं, जहाँ उनके जुड़वाँ पुत्र लव और कुश जन्म लेते और पलते हैं। राम दूसरा विवाह नहीं करते; हर यज्ञ में उनके साथ सीता की स्वर्ण-प्रतिमा बैठती है।

वाल्मीकि बालकों को अपनी रची रामायण सिखाते हैं। वर्षों बाद राम के अश्वमेध यज्ञ में दो बाल-गायक राजा के सामने वह काव्य गाते हैं और राम अपने पुत्रों को पहचान लेते हैं। सीता से सभा के सामने पुनः अपनी पवित्रता की साक्षी देने को कहा जाता है। वे अपनी माता पृथ्वी को पुकारती हैं कि यदि मैं सच्ची हूँ तो मुझे स्थान दो। धरती फटती है और सीता उसमें समा जाती हैं।

राम अनेक वर्ष और शासन करते हैं। शत्रुघ्न लवणासुर को मारकर मथुरा बसाते हैं। जब राम का कार्य पूर्ण होता है, वे राज्य पुत्रों में बाँट देते हैं, अयोध्यावासियों के साथ सरयू तक जाते हैं और उस स्थान पर जल में प्रवेश करते हैं जिसे गुप्तार घाट कहा जाता है।

पाठकों के लिए टिप्पणी

अनेक विद्वानों का मत है कि उत्तरकाण्ड के कुछ अंश वाल्मीकि के काव्य में बाद में जुड़े, और तुलसीदास की रामचरितमानस अपनी कथा रामराज्य पर ही समाप्त करती है। सीता-त्याग के प्रसंग पर भारत में सदियों से विचार और प्रश्न होते रहे हैं। यहाँ यह इसलिए कहा गया है कि यह परम्परा का अंग है, इसलिए नहीं कि हर पाठक इसके हर निर्णय से सहमत हो।

सीख

पहले के काण्ड बताते हैं कि मनुष्य पर माता-पिता, जीवनसाथी और मित्रों का क्या ऋण है; यह काण्ड पूछता है कि शासक पर जनता का क्या ऋण है, और वह कितना भारी हो सकता है। अन्तिम वचन सीता का है: वे याचना नहीं करतीं और किसी और की शर्त पर नहीं लौटतीं। पढ़ें सीता की गरिमा और दृढ़ता और रामराज्य: सेवा के रूप में नेतृत्व।

अयोध्या में त्रेता के ठाकुर का सम्बन्ध राम के अश्वमेध यज्ञ से और नागेश्वरनाथ मंदिर का कुश से माना जाता है। रामायण के आरम्भ पर लौटें।

यह काण्ड विस्तार से पढ़ें और सुनें

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  5. 5श्रीराम का महाप्रस्थानवर्षों के शासन के बाद काल राम के पास आता है। लक्ष्मण नगर को बचाने के लिए स्वयं को अर्पित करते हैं, पुत्रों का अभिषेक होता है, और राम पूरी अ…

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