बुज़ुर्गों और बच्चों के साथ अयोध्या
वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग परिजनों या छोटे बच्चों के साथ अयोध्या यात्रा: व्हीलचेयर, पैदल दूरी, विश्राम, समय और साथ क्या रखें।
यह सहजता से हो सकता है
अनेक परिवारों के लिए माता-पिता या दादा-दादी को अयोध्या लाना ही यात्रा का उद्देश्य होता है। हाल के वर्षों में नगर उनके लिए बहुत सुगम हुआ है: चौड़े पथ, रैम्प, व्हीलचेयर और मुख्य मंदिर पर सहायता केन्द्र। अन्तर इससे पड़ता है कि दिन की योजना स्थलों की सूची के बजाय उनकी शक्ति के अनुसार बने।
सही तिथियाँ चुनें
अक्टूबर से मार्च के बीच, सामान्य कार्य-दिवसों पर आएँ, और रामनवमी, दीपोत्सव, कार्तिक मेलों और नव वर्ष के सप्ताह से दूर रहें। मई-जून से बचें। दिसम्बर के अन्त और जनवरी में कोहरा छँटने के बाद ही निकलें। देखें जाने का उत्तम समय।
पास ठहरें
राम पथ या नया घाट के पास का कमरा लम्बी यात्रा बचाता है और बुज़ुर्ग दोपहर में लौटकर विश्राम कर सकते हैं। भूतल या लिफ़्ट, पाश्चात्य शैली का शौचालय और गर्म पानी माँगें। देखें कहाँ ठहरें।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में
प्रवेश से मंदिर तक और वापसी का पैदल मार्ग लम्बा है। तीर्थयात्री सुविधा केन्द्र पर व्हीलचेयर माँगें; स्वयंसेवक और कर्मचारी बुज़ुर्ग और दिव्यांग यात्रियों की सहायता करते हैं, और वहाँ बैठने की जगह, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक उपचार है। मंदिर में रैम्प और लिफ़्ट हैं। व्यवस्थाएँ समय-समय पर सुधरती हैं, इसलिए पहुँचते ही सहायता केन्द्र पर वरिष्ठ नागरिकों के वर्तमान मार्ग के बारे में पूछें। पढ़ें दर्शन मार्गदर्शिका।
हनुमानगढ़ी में
76 सीढ़ियाँ खड़ी और भीड़ भरी हैं। विकल्प: रुक-रुककर धीरे चढ़ें और परिवार का कोई सदस्य साथ रहे; खुलने के समय जाएँ जब भीड़ न हो; या बुज़ुर्ग सीढ़ियों के नीचे से ही प्रणाम करें, जैसा अनेक लोग करते हैं। श्रद्धा सीढ़ियों से नहीं नापी जाती।
एक सहज दिन
- प्रातः: राम मंदिर, आवश्यकता हो तो व्हीलचेयर से।
- फिर कनक भवन, जो समतल है और जहाँ बैठने को आँगन है।
- 11 बजे तक कमरे पर लौटकर भोजन और विश्राम।
- 4:30 बजे ई-रिक्शा से राम की पैड़ी और सरयू आरती, ऊपर की सीढ़ियों पर बैठकर।
- गुप्तार घाट या भरत कुण्ड दूसरे दिन गाड़ी से।
बुज़ुर्गों के लिए क्या रखें
- पूरी यात्रा और दो अतिरिक्त दिनों की नियमित दवाएँ, पर्चे सहित।
- रोगों, एलर्जी की सूची और पारिवारिक चिकित्सक का नंबर।
- छड़ी, हल्का फ़ोल्डिंग स्टूल, मोज़े, ऋतु के अनुसार टोपी या शॉल।
- मधुमेह वालों के लिए ग्लूकोज़ या बिस्कुट, ओआरएस और पानी की बोतल।
- जेब में पहचान-पत्र और आपके मोबाइल नंबर की पर्ची।
छोटे बच्चों के साथ
नाश्ता, पानी और एक जोड़ी कपड़े रखें। हर पंक्ति में और जल के पास हाथ पकड़े रखें। अपना फ़ोन नंबर बच्चे की बाँह पर या जेब के कार्ड पर लिखें। पहुँचने से पहले उस स्थान की कथा सुनाएँ: हनुमानगढ़ी के लिए हनुमान, राम मंदिर के लिए बालकाण्ड। जो बच्चे कथा जानते हैं, वे ऊबते नहीं।
कोई अस्वस्थ हो जाए तो
उन्हें छाया में बैठाएँ, पानी दें और 108 पर कॉल करें। हर प्रमुख स्थान पर पुलिस और स्वयंसेवक सहायता करेंगे। सूची: अस्पताल और क्लिनिक, मेडिकल स्टोर और व्हीलचेयर और बुज़ुर्ग सहायता। हमारी टीम इन मार्गों को जानने वाले सहयोगी की व्यवस्था कर सकती है: गाइडेड टूर का अनुरोध करें।
समय, प्रवेश नियम, मार्ग और दरें बदलती रहती हैं, विशेषकर पर्वों पर। यात्रा से पहले मंदिर, जिला प्रशासन या सेवा प्रदाता से पुष्टि अवश्य करें।
अंतिम अद्यतन:
आगे पढ़ें
त्रेता के ठाकुर: अश्वमेध यज्ञ का स्थल
अयोध्या में नया घाट के पास त्रेता के ठाकुर वह स्थान माना जाता है जहाँ श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ किया। श्याम शिला के विग्रह और कथा।
सीता की रसोई
अयोध्या में जन्मभूमि के पास सीता की रसोई वह स्थान मानी जाती है जहाँ नववधू सीता ने पहली बार भोजन बनाया। इसका अर्थ और अन्नपूर्णा परम्परा।
लता मंगेशकर चौक और विशाल वीणा
अयोध्या में नया घाट के पास लता मंगेशकर चौक एक प्रमुख चौराहा है, जहाँ असंख्य राम-भजन गाने वाली गायिका के सम्मान में 40 फुट की वीणा स्थापित है।
अयोध्या में रामनवमी: श्रीराम जन्मोत्सव
चैत्र शुक्ल नवमी को श्रीराम का जन्मोत्सव रामनवमी: अर्थ, अयोध्या में दोपहर का उत्सव, सूर्य तिलक और भीड़ के अनुसार योजना।
अयोध्या दीपोत्सव: दीपों का महापर्व
दीपावली की पूर्व संध्या पर अयोध्या का दीपोत्सव राम की पैड़ी पर लाखों दीपों से श्रीराम की वापसी को फिर जीता है। अर्थ, कार्यक्रम और कैसे सम्मिलित हों।
विवाह पंचमी: राम-सीता विवाहोत्सव
विवाह पंचमी मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को श्रीराम और सीता के विवाह का पर्व है। अयोध्या राम बारात के साथ इसे कैसे मनाती है, और इसका अर्थ।