कनक भवन: सीता-राम का महल
अयोध्या का कनक भवन वह स्वर्ण महल माना जाता है जो कैकेयी ने नववधू सीता को दिया। इसकी कथा, स्वर्ण-मुकुटधारी विग्रह और दर्शन की जानकारी।

कथा
कनक का अर्थ है सोना। परम्परा कहती है कि जब सीता राम की वधू बनकर अयोध्या आईं, तब रानी कैकेयी ने उन्हें "मुँह दिखाई" में सोने का महल दिया। कनक भवन वहीं है जहाँ वह महल माना जाता है। यह राम और सीता का निजी निवास था, और भक्त आज भी इसे सीता जी का घर मानते हैं; यहाँ राम पति और जामाता हैं, और भाव राजसी से अधिक कोमल है।
एक बात पर श्रद्धालु प्रायः ठहरते हैं। जिस कैकेयी ने सीता को स्वर्ण महल दिया, उसी ने बाद में उन्हें वन भेजा। रामायण एक कर्म से दूसरे को मिटने नहीं देती; देखें अयोध्याकाण्ड और माता-पिता और गुरु का सम्मान।
भवन का इतिहास
मान्यता है कि यह महल युगों में कई बार बना: कुश द्वारा, राजा विक्रमादित्य द्वारा और अन्य द्वारा। आज जो मंदिर दिखता है उसे 1891 में बुन्देलखण्ड के ओरछा-टीकमगढ़ की महारानी वृषभानु कुँवरि ने बनवाया, और बड़े खुले आँगन के चारों ओर मेहराबदार दालानों वाली इसकी बनावट सामान्य मंदिर से अधिक बुन्देला महल जैसी है।
आप क्या देखेंगे
गर्भगृह में राम-सीता के भिन्न आकार के तीन युगल विग्रह हैं, स्वर्ण मुकुट धारण किए। आँगन में प्रायः भक्त भजन गाते मिलते हैं, और सावन में झूला उत्सव पर भगवान झूले पर विराजते हैं। संध्या की रोशनी बहुत सुन्दर लगती है।
दर्शन के सुझाव
- यह हनुमानगढ़ी और दशरथ महल से थोड़ी ही पैदल दूरी पर है; अधिकांश श्रद्धालु तीनों साथ देखते हैं।
- अयोध्या के अधिकांश मंदिरों की तरह यह भी दोपहर में कुछ घंटे बन्द रहता है। सुबह या शाम की योजना बनाएँ।
- कुछ मिनट आँगन में बैठें; यह पुराने नगर के शान्त स्थानों में है।
आगे: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर या सीता की रसोई।
समय, प्रवेश नियम, मार्ग और दरें बदलती रहती हैं, विशेषकर पर्वों पर। यात्रा से पहले मंदिर, जिला प्रशासन या सेवा प्रदाता से पुष्टि अवश्य करें।
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