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अयोध्या

हनुमानगढ़ी: अयोध्या के रक्षक

हनुमानगढ़ी, अयोध्या में टीले पर बना हनुमान जी का गढ़-मंदिर: राम मंदिर से पहले यहाँ दर्शन क्यों, 76 सीढ़ियाँ, कथा और दर्शन के सुझाव।

Hanuman Garhi temple in Ayodhya
Photo: Immanuelle / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

कथा

परम्परा कहती है कि जब श्रीराम संसार से जाने लगे, तब उन्होंने अयोध्या हनुमान को सौंपी और कहा कि यहीं रहकर इसकी रक्षा करो। इसलिए हनुमान नगर के कोतवाल हैं, और हनुमानगढ़ी उनका आसन है: पुराने नगर के बीच टीले पर छोटे दुर्ग (गढ़ी) जैसा बना मंदिर, जहाँ से वे जन्मभूमि की निगरानी करते माने जाते हैं।

परम्परा का तर्क

श्रद्धालु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से पहले हनुमानगढ़ी जाते हैं। तर्क वही है जो घर में प्रवेश से पहले द्वारपाल से मिलने का है: प्रभु के दर्शन के लिए रक्षक की आज्ञा ली जाती है। यह रामायण की उस मान्यता को भी दर्शाता है कि राम तक का मार्ग उनके भक्त से होकर जाता है। हनुमान चालीसा में तुलसीदास कहते हैं: राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे।

आप क्या देखेंगे

छिहत्तर सीढ़ियाँ चढ़कर एक परकोटे में पहुँचते हैं जिसके कोनों पर गोल बुर्ज हैं। मुख्य मंदिर में माता अंजनी की गोद में बैठे बाल हनुमान का छोटा विग्रह है, मालाओं से ढका हुआ। मंदिर रामानन्दी साधुओं की एक प्राचीन परम्परा की देखरेख में है। वर्तमान भवन अठारहवीं शताब्दी का है, और परम्परा के अनुसार अवध के एक नवाब ने मनोकामना पूरी होने पर इसके लिए भूमि और सहयोग दिया, जो इस क्षेत्र के साझा इतिहास की याद दिलाता है। ऊपर से अयोध्या का विस्तृत दृश्य दिखता है।

दर्शन के सुझाव

  • मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के दिन हैं और बहुत भीड़ रहती है; प्रातः जल्दी जाएँ।
  • सीढ़ियाँ खड़ी हैं। बुज़ुर्ग रेलिंग पकड़कर धीरे चढ़ें; सहायता के लिए मंदिर कर्मियों से पूछें।
  • बेसन के लड्डू यहाँ का पारम्परिक भोग हैं और नीचे की गली में मिलते हैं। उसी दुकान से लें जहाँ दर लिखी हो।
  • भीड़ भरी गली में सामान और जूते-चप्पल का ध्यान रखें, और हाथ में प्रसाद हो तो बन्दरों से सावधान रहें।

अनेक श्रद्धालु यहाँ हनुमान चालीसा या सुन्दरकाण्ड का पाठ करते हैं। इसके बाद दशरथ महल और कनक भवन पैदल जाएँ। सम्बन्धित: विनम्रता और सेवा।

समय, प्रवेश नियम, मार्ग और दरें बदलती रहती हैं, विशेषकर पर्वों पर। यात्रा से पहले मंदिर, जिला प्रशासन या सेवा प्रदाता से पुष्टि अवश्य करें।

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