राम की पैड़ी: लाखों दीपों के घाट
राम की पैड़ी अयोध्या में सरयू के किनारे स्नान-घाटों की लम्बी शृंखला है, जहाँ दीपोत्सव मनाया जाता है। क्या देखें और कब जाएँ।

स्थान
पैड़ी का अर्थ है सीढ़ियाँ। राम की पैड़ी सरयू से निकाली गई जलधारा के किनारे बने सीढ़ीदार घाटों की लम्बी शृंखला है, नया घाट के पास। जल के दोनों ओर सीढ़ियाँ हैं, जिनके किनारे मंदिर और मण्डप हैं, और रात में पूरा विस्तार जगमगाता है।
कथा
सरयू अयोध्या की पवित्र नदी है, और मान्यता है कि इसमें स्नान करके ही तीर्थयात्री मंदिरों के दर्शन को जाए। एक प्रचलित कथा कहती है कि जब लक्ष्मण ने सभी तीर्थों की यात्रा की इच्छा की, तब राम ने यह स्नान-स्थल स्थापित किया और कहा कि सूर्योदय से पहले सभी पवित्र नदियाँ यहाँ स्नान करने आती हैं, इसलिए इन सीढ़ियों पर एक डुबकी में सबका पुण्य है। कथा का आशय सरल है: पवित्रता पाने के लिए हर जगह भटकना आवश्यक नहीं।
दीपोत्सव
राम की पैड़ी दीपोत्सव का मंच है, जो दीपावली की पूर्व संध्या पर उस रात को फिर जीने के लिए मनाया जाता है जब अयोध्या ने राम की वापसी पर दीप जलाए थे; कथा युद्धकाण्ड में है। स्वयंसेवक हर सीढ़ी पर मिट्टी के दीप सजाते हैं; हाल के वर्षों में एक साथ बीस लाख से अधिक दीप जले हैं और यह आयोजन बार-बार विश्व कीर्तिमान के रूप में प्रमाणित हुआ है। यदि आप जीवन में एक ही बार अयोध्या आ सकें और भीड़ सह सकें, तो यही रात चुनें।
क्या करें
- किसी भी दिन संध्या को आएँ। रोशनी जलती है, मंदिरों में घंटे बजते हैं, और प्रायः राम-कथा पर लेज़र व ध्वनि प्रदर्शन होता है।
- पूरा विस्तार पैदल देखें; नागेश्वरनाथ मंदिर इन्हीं घाटों पर है।
- वहीं स्नान करें जहाँ सीढ़ियाँ और रेलिंग हों। यह धारा मुख्य नदी से शान्त है, फिर भी बच्चों का हाथ पकड़े रखें।
- घाट स्वच्छ रखें: दीप, फूल या प्लास्टिक जल में न छोड़ें।
इसके साथ कुछ ही मिनट की दूरी पर सरयू घाट की संध्या आरती देखें। योजना के लिए: एक दिन में अयोध्या।
समय, प्रवेश नियम, मार्ग और दरें बदलती रहती हैं, विशेषकर पर्वों पर। यात्रा से पहले मंदिर, जिला प्रशासन या सेवा प्रदाता से पुष्टि अवश्य करें।
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