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अयोध्या

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या

अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर बना मंदिर: कथा, वास्तुकला, रामलला का विग्रह, दर्शन की व्यवस्था और यात्रियों के लिए उपयोगी सुझाव।

Shri Ram Janmabhoomi Mandir in Ayodhya
Photo: Narendra Modi / Wikimedia Commons, CC BY 3.0

स्थान

श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या के रामकोट क्षेत्र का वह स्थान है जिसे हिन्दू परम्परा श्रीराम का जन्मस्थान मानती है, जहाँ माता कौशल्या ने उन्हें जन्म दिया, जैसा बालकाण्ड में वर्णित है। श्रद्धालुओं के लिए यह अयोध्या का हृदय है, और नगर के अन्य तीर्थ इसी के सन्दर्भ में समझे जाते हैं।

मंदिर कैसे बना

यह स्थल लम्बे न्यायिक विवाद का विषय रहा, जिस पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवम्बर 2019 को निर्णय दिया और मंदिर निर्माण के लिए न्यास बनाने का निर्देश दिया। भारत सरकार ने फरवरी 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का गठन किया। भूमि पूजन 5 अगस्त 2020 को हुआ, और रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को। ऊपरी तलों और परिसर का कार्य उसके बाद भी चलता रहा, और मुख्य मंदिर के पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नवम्बर 2025 में शिखर पर ध्वज फहराया गया।

वास्तुकला

मंदिर उत्तर भारत की नागर शैली में बना है, जिसकी रूपरेखा मंदिर-शिल्पी सोमपुरा परिवार ने बनाई। न्यास के प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार इसकी लम्बाई लगभग 380 फुट, चौड़ाई लगभग 250 फुट और ऊँचाई लगभग 161 फुट है; तीन तल, 392 नक्काशीदार स्तम्भ और 44 द्वार हैं। यह राजस्थान के गुलाबी बलुआ पत्थर से बिना लोहे के बनाया गया है ताकि सदियों तक टिके। मुख्य द्वार पूर्व की ओर है, और पाँच मण्डप गर्भगृह तक ले जाते हैं।

रामलला का विग्रह

गर्भगृह में रामलला विराजमान हैं: पाँच वर्ष के बालक रूप में श्रीराम, 51 इंच ऊँचे, जिन्हें मैसूरु के शिल्पकार अरुण योगीराज ने श्याम शिला से गढ़ा है। प्रथम तल पर राम दरबार है: सीता, भाइयों और हनुमान सहित श्रीराम।

दर्शन: जानने योग्य बातें

  • दर्शन निःशुल्क है। कोई व्यक्ति या वेबसाइट प्रवेश या पंक्ति में स्थान नहीं बेच सकती।
  • प्राचीन परम्परा के अनुसार पहले हनुमानगढ़ी के दर्शन करें।
  • फ़ोन, कैमरा, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ, बैग और चमड़े का सामान भीतर नहीं ले जा सकते। इन्हें तीर्थयात्री सुविधा केन्द्र के लॉकर में रखें और टोकन सँभालकर रखें।
  • प्रवेश-स्थल से पैदल मार्ग लम्बा है। सुविधा केन्द्र पर व्हीलचेयर और बुज़ुर्गों के लिए सहायता मिलती है।
  • आरती पास, जहाँ उपलब्ध हों, केवल न्यास जारी करता है। वर्तमान समय और पास के लिए आधिकारिक वेबसाइट srjbtkshetra.org देखें।
  • कार्य-दिवस की प्रातःकाल प्रायः सबसे शान्त होती है। रामनवमी जैसे पर्वों पर भारी भीड़ रहती है।

पूरी क्रमवार जानकारी हमारी राम मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका में है। निकट: कनक भवन, दशरथ महल और सीता की रसोई।

समय, प्रवेश नियम, मार्ग और दरें बदलती रहती हैं, विशेषकर पर्वों पर। यात्रा से पहले मंदिर, जिला प्रशासन या सेवा प्रदाता से पुष्टि अवश्य करें।

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