भगीरथ: जो गंगा को धरती पर लाए
अयोध्या के राजा भगीरथ ने पूर्वजों की मुक्ति हेतु गंगा को स्वर्ग से लाने के लिए राज्य छोड़कर वर्षों तप किया। उनका नाम अथक प्रयास का पर्याय है।
कथा
सगर के साठ हज़ार पुत्रों की मुक्ति के लिए गंगा को लाने में तीन पीढ़ियाँ असफल रही थीं। निःसन्तान भगीरथ ने राज्य मंत्रियों को सौंपा और वह करने हिमालय गए जो उनके पूर्वज न कर सके।
उन्होंने वर्षों तप किया, तब ब्रह्मा ने प्रकट होकर वर दिया। पर एक संकट था: स्वर्ग से गिरती गंगा का वेग पृथ्वी को विदीर्ण कर देता। उसे केवल शिव धारण कर सकते थे। भगीरथ ने फिर से तप आरम्भ किया, एक अँगूठे पर खड़े होकर शिव की आराधना की, और शिव ने नदी को अपने शीश पर लेना स्वीकार किया। अपनी शक्ति के अभिमान में गंगा ने शिव को बहा ले जाना चाहा; शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में बाँध लिया और तब तक रोके रखा जब तक भगीरथ ने तीसरी बार प्रार्थना नहीं की।
फिर गंगा भगीरथ के रथ के पीछे मैदानों में चलीं। मार्ग में उनके जल ने जह्नु ऋषि की यज्ञभूमि डुबो दी; ऋषि ने क्रोध में उन्हें पी लिया और विनती पर ही छोड़ा, इसलिए वे जाह्नवी कहलाईं। अन्त में वे वहाँ पहुँचीं जहाँ राख पड़ी थी, और सगर-पुत्र मुक्त हुए। भगीरथ के लाने से गंगा भागीरथी कहलाती हैं।
उनका महत्त्व
विश्वामित्र यह कथा बालकाण्ड में गंगा के ही तट पर राम को सुनाते हैं। जिस नदी पर आधा उत्तर भारत निर्भर है, वह परम्परा में राम के पूर्वज की देन है।
सीख
भारतीय भाषाओं में "भगीरथ प्रयत्न" वह प्रयास है जो रुकना नहीं जानता। देखिए उस प्रयास में क्या था: वे एक बार सफल हुए, नई बाधा आई, और उन्होंने फिर आरम्भ किया, तीन बार। और उन्होंने उन लोगों के लिए श्रम किया जो कब के जा चुके थे और उन्हें कुछ दे नहीं सकते थे। मनुष्य के सबसे बड़े कार्य प्रायः ऐसे ही होते हैं: दूसरों से मिला अधूरा काम, आने वालों के लिए पूरा किया गया।
वंश में आगे: दिलीप। सम्बन्धित शिक्षा: विपत्ति में साहस और धैर्य।
अंतिम अद्यतन:
आगे पढ़ें
सीता: भूमिजा, जनकनन्दिनी
राजा जनक को हल की रेखा में मिलीं, श्रीराम की पत्नी सीता: जन्म, विवाह, वनवास, लंका में बन्दी जीवन, पुत्र, और वे लक्ष्मी-स्वरूपा क्यों पूजी जाती हैं।
लक्ष्मण: समर्पित भ्राता
सुमित्रानन्दन लक्ष्मण श्रीराम के साथ वन गए, चौदह वर्ष उनकी रक्षा की और मेघनाद का वध किया। उनका जीवन, स्वभाव और निष्ठा।
शबरी: जीवन भर की प्रतीक्षा
वृद्धा वनवासी भक्त शबरी ने दशकों अपने आश्रम में श्रीराम की प्रतीक्षा की और उन्हें बेर अर्पित किए। उनकी कथा और नवधा भक्ति।
सच्ची मित्रता: गुह, सुग्रीव और विभीषण
श्रीराम ने निषादराज, निर्वासित वानर और शत्रु के भाई को मित्र बनाया। रामायण के अनुसार मित्र कौन है और मित्र का कर्तव्य क्या है।
समता और करुणा: शबरी, केवट और जटायु
श्रीराम ने वनवासी स्त्री के बेर खाए, केवट को गले लगाया और एक पक्षी का पिता की तरह संस्कार किया। गरिमा और जन्म पर इन प्रसंगों की सीख।
सीता की गरिमा और दृढ़ता
सीता ने वन चुना, वर्ष भर अकेले रावण का सामना किया, अकेले दो पुत्रों को पाला और अपनी शर्त पर विदा हुईं। आन्तरिक शक्ति पर उनके जीवन की सीख।