श्रीराम जन्मभूमिअयोध्या · रामायण · यात्रा मार्गदर्शिका

रघुकुल

अज और इन्दुमती: श्रीराम के पितामह

रघु के पुत्र और दशरथ के पिता राजा अज ने स्वयंवर में इन्दुमती को पाया और एक गिरती माला से उन्हें खो दिया। प्रेम, शोक और कर्तव्य की कथा।

कथा

अज रघु के पुत्र थे। कालिदास ने रघुवंश के सबसे प्रशंसित सर्गों में उनकी कथा कही है। विदर्भ की राजकुमारी इन्दुमती का स्वयंवर हुआ। सखी उन्हें एक-एक राजा के सामने ले जाती और उसका यश सुनाती, और इन्दुमती हर एक को पीछे छोड़ आगे बढ़ जातीं, जैसे रात में दीपशिखा मार्ग से निकलती है और पीछे हर मुख अँधेरे में रह जाता है। अज के सामने वे रुकीं और वरमाला पहना दी।

दोनों ने अयोध्या पर राज किया और उनके पुत्र दशरथ हुए। एक दिन वे उपवन में बैठे थे कि आकाश-मार्ग से जाते नारद की वीणा से दिव्य पुष्पों की माला गिरी और इन्दुमती को छू गई। वे निष्प्राण हो गईं। पूर्वजन्म में वे एक अप्सरा थीं, जिनका शाप उन्हीं पुष्पों के स्पर्श से समाप्त होना था।

इन्दुमती के लिए अज का विलाप संस्कृत काव्य में प्रसिद्ध है। गुरु वसिष्ठ ने सान्त्वना भेजी: ज्ञानी असीम शोक नहीं करते, क्योंकि देह एक मिलन है जिसका अन्त वियोग में होना ही है। अज ने सुना और कर्तव्य नहीं छोड़ा। वे बालक पुत्र के लिए तब तक जीवित रहे जब तक दशरथ शासन के योग्य न हो गए, और तब ही देह त्यागी।

उनका महत्त्व

अज दानी रघु और राम के पिता के बीच की कड़ी हैं। उनकी कथा वंश का वह पक्ष भी दिखाती है जो व्रतों और विजयों के बीच छूट जाता है: ये लोग गहरा प्रेम करते थे। राम के वनवास पर शोक से दशरथ का देहान्त और सीता के लिए राम का विलाप इसी कुल की रीति है।

सीख

रघुवंश अज को शोक के लिए नहीं डाँटता। वह दिखाता है कि उन्होंने शोक और दायित्व दोनों साथ उठाए, जब तक सन्तान को उनकी आवश्यकता थी। कर्तव्य का यह चित्र उस दिखावे से अधिक सच्चा है कि कुछ अनुभव ही नहीं होता। देखें विपत्ति में साहस और धैर्य।

वंश में आगे: दशरथ।

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