इक्ष्वाकु: सूर्यवंश के संस्थापक
वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु अयोध्या के प्रथम राजा और उस सूर्यवंश के संस्थापक माने जाते हैं जिसमें श्रीराम का जन्म हुआ।
वे कौन थे
परम्परा अयोध्या के वंश का मूल सूर्य में मानती है। सूर्यदेव विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु हुए, जो मानव जाति के आदि पिता और प्रथम विधि-निर्माता माने जाते हैं। मनु के ज्येष्ठ पुत्र इक्ष्वाकु थे। रामायण के अनुसार स्वयं मनु ने सरयू तट पर अयोध्या बसाई और उसे इक्ष्वाकु को सौंपा, जो उसके प्रथम राजा बने। उन्हीं से इस वंश का सबसे पुराना नाम इक्ष्वाकु वंश है; सूर्य से उत्पन्न होने के कारण यह सूर्यवंश भी कहलाता है।
उनका महत्त्व
मिथिला में विवाह के समय जब वसिष्ठ राम की वंशावली सुनाते हैं, तो यहीं से आरम्भ करते हैं। वंश का हर राजा संस्थापक की कसौटी पर परखा गया: धर्म से शासन करो, प्रजा की रक्षा पिता की तरह करो और राजा का वचन निभाओ। जैन और बौद्ध परम्पराएँ भी इक्ष्वाकु नाम का आदर से स्मरण करती हैं।
सूची पर एक टिप्पणी: रामायण और विभिन्न पुराणों में इक्ष्वाकु से राम तक की पीढ़ियों का क्रम और संख्या अलग-अलग मिलती है। यह साइट किसी एक सूची का दावा न करके सबसे प्रसिद्ध राजाओं का वर्णन करती है।
सीख
नींव तय करती है कि उस पर क्या बनेगा। इक्ष्वाकु किसी विजय से अधिक उस आचरण-नियम के लिए याद किए जाते हैं जिससे उनके वंशज दर्जनों पीढ़ियों बाद भी स्वयं को बँधा मानते थे। परिवार, संस्था या व्यवसाय भी ऐसे ही बनते हैं: इस बात से कि उनके पहले लोगों ने क्या करने से इनकार किया।
वंश में आगे: हरिश्चन्द्र। देखें श्रीराम और मनु की बसाई नगरी के स्थल।
अंतिम अद्यतन:
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शत्रुघ्न: मौन सेवक भ्राता
दशरथ के सबसे छोटे पुत्र शत्रुघ्न ने भरत की सेवा की, वनवास काल में अयोध्या सँभाली, लवणासुर का वध किया और मथुरा नगरी बसाई।
विभीषण: कुल से ऊपर धर्म
रावण के भाई विभीषण ने सीता को लौटाने की सलाह दी, निकाले गए, श्रीराम की शरण ली और लंका के धर्मनिष्ठ राजा बने।
शबरी: जीवन भर की प्रतीक्षा
वृद्धा वनवासी भक्त शबरी ने दशकों अपने आश्रम में श्रीराम की प्रतीक्षा की और उन्हें बेर अर्पित किए। उनकी कथा और नवधा भक्ति।
भ्रातृ-प्रेम और परिवार: भरत और लक्ष्मण
चार भाई और एक सिंहासन जिसे कोई दूसरे से छीनना नहीं चाहता: भाई-बहन, उत्तराधिकार और परिवार को जोड़े रखने पर रामायण की सीख।
सच्ची मित्रता: गुह, सुग्रीव और विभीषण
श्रीराम ने निषादराज, निर्वासित वानर और शत्रु के भाई को मित्र बनाया। रामायण के अनुसार मित्र कौन है और मित्र का कर्तव्य क्या है।
अहंकार पर विजय: रावण की सीख
रावण के पास विद्या, बल और स्वर्ण-नगरी थी, और अहंकार व वासना में उसने सब खो दिया। रामायण ने खलनायक को विद्वान क्यों बनाया, और यह किससे सावधान करता है।