विपत्ति में साहस और धैर्य
वनवास, सीता का वियोग, युद्ध में मूर्छित भाई: श्रीराम ने अपने सबसे कठिन दिनों का सामना कैसे किया, और हम अपने दिनों का कैसे करें।
प्रसंग
पच्चीस वर्ष की आयु के बाद राम का जीवन आघातों की शृंखला था। अभिषेक की सुबह राज्य गया। उनके दूर रहते पिता चल बसे। अपनी ही कुटिया से पत्नी का हरण हुआ। रणभूमि में भाई मरणासन्न पड़ा था और भोर निकट थी। रामायण उनकी पीड़ा नहीं छिपाती। सीता-हरण के बाद वे वन में वृक्षों और नदी से पूछते फिरते हैं कि क्या तुमने उसे देखा। लक्ष्मण के गिरने पर कहते हैं कि पत्नी और राज्य फिर मिल सकते हैं, पर सहोदर भाई नहीं।
और फिर भी हर बार वे उठ खड़े होते हैं। जटायु का संस्कार करते हैं, दक्षिण की ओर चलते हैं, मित्र बनाते हैं, सेतु बाँधते हैं।
तर्क
महाकाव्य दो बातों को अलग करता है जिन्हें हम प्रायः एक समझ लेते हैं: शोक अनुभव करना और शोक के वश में हो जाना। राम रोते हैं, और इसे दुर्बलता नहीं माना गया। पर वे रोते हुए निर्णय नहीं लेते। लक्ष्मण के स्थिर वचन उन्हें लौटा लाते हैं, और तब वे एकमात्र उपयोगी प्रश्न पूछते हैं: अगला कदम क्या है?
रामायण में धैर्य सक्रिय है। वन के चौदह वर्ष उनके बीतने की प्रतीक्षा में नहीं गए। राम ने ऋषियों की रक्षा की, देश को जाना और वे मित्र बनाए जो आगे उनकी सेना बने। किष्किन्धा के वर्षा के चार मास, जब कुछ नहीं हो सकता था, सहे गए और उसके तुरन्त बाद कर्म हुआ।
साहस भी भय या शोक का अभाव नहीं है। साहस लंका में अकेले और क्षण भर को निराश हनुमान का यह निश्चय है कि एक वाटिका और खोज लूँ।
इसे कैसे अपनाएँ
- हानि को अनुभव करें। फिर रुकने और कर्म करने का समय तय करें।
- सबसे बुरे दिन बड़े निर्णय न लें। अपने पास लक्ष्मण जैसा कोई रखें जो स्पष्ट बोले।
- समस्या को केवल अगले कदम में बाँटें: "लंका से कैसे लाऊँगा" नहीं, "कौन बताएगा कि वे किस दिशा में गए"।
- प्रतीक्षा के समय को तैयारी में लगाएँ।
- स्मरण रखें कि वनवास समाप्त हुआ था। कठिन समय समाप्त होता है।
आगे: विनम्रता और सेवा। परिवार कठिन समय में इसी कारण सुन्दरकाण्ड का पाठ करते हैं।
अंतिम अद्यतन:
आगे पढ़ें
बालकाण्ड: श्रीराम का जन्म और बाल्यकाल
रामायण का पहला काण्ड: दशरथ का यज्ञ, अयोध्या में चारों राजकुमारों का जन्म, विश्वामित्र के साथ यात्रा और राम-सीता का विवाह।
सुन्दरकाण्ड: हनुमान की लंका-यात्रा
रामायण का पाँचवाँ और सबसे प्रिय काण्ड: हनुमान समुद्र लाँघते हैं, अशोक वाटिका में सीता को पाते हैं, लंका दहन करते हैं और संदेश लेकर लौटते हैं।
युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका का युद्ध
रामायण का छठा काण्ड: विभीषण की शरणागति, समुद्र पर सेतु, कुम्भकर्ण, मेघनाद और रावण का अन्त, और अयोध्या वापसी।
लक्ष्मण: समर्पित भ्राता
सुमित्रानन्दन लक्ष्मण श्रीराम के साथ वन गए, चौदह वर्ष उनकी रक्षा की और मेघनाद का वध किया। उनका जीवन, स्वभाव और निष्ठा।
भरत: जिन्होंने सिंहासन ठुकरा दिया
कैकेयी-पुत्र भरत को अयोध्या मिली और उन्होंने लौटा दी। चौदह वर्ष उन्होंने नन्दीग्राम से श्रीराम की पादुकाओं के नाम पर शासन किया।
रावण: अहंकार से नष्ट हुआ विद्वान राजा
लंका का दशानन राजा रावण: विद्वान, संगीतज्ञ और शिव-भक्त, जिसकी वासना और अहंकार ने उसके कुल और स्वर्ण-नगरी का नाश किया।