रामराज्य: सेवा के रूप में नेतृत्व
रामायण में रामराज्य का अर्थ, उसके पीछे के सिद्धान्त, और वे परिवार, दल, व्यवसाय या शासन का नेतृत्व करने वाले हर व्यक्ति पर कैसे लागू होते हैं।
वर्णन
रामायण राम के शासन का वर्णन कुछ अद्भुत पंक्तियों में करती है। किसी को दैहिक, दैविक या भौतिक ताप नहीं सताता था। कोई अकाल मृत्यु नहीं मरता था। कोई दरिद्र, दुःखी या अशिक्षित नहीं था। लोग वैर-रहित थे और अपने-अपने धर्म पर चलते थे। द्वारों पर ताले नहीं थे। वर्षा समय पर होती थी। तुलसीदास कहते हैं: रामराज्य में "दण्ड" केवल संन्यासियों के हाथ में था और "जीतो" केवल मन के लिए सुना जाता था।
सिद्धान्त
यह कैसे सम्भव हुआ? उत्तर राम के आचरण में है, और उन प्रश्नों में जो वे चित्रकूट में भरत से पूछते हैं, अयोध्याकाण्ड की वह शासक-सूची: क्या तुम्हारे मंत्री ईमानदार और योग्य हैं? क्या किसान और पशुपालक सन्तुष्ट हैं? क्या सैनिकों को समय पर वेतन मिलता है? क्या तुम प्रातः उठते हो? क्या न्याय धनी और निर्धन के लिए समान है?
चार सिद्धान्त उभरते हैं।
- नेता पहले स्वयं बँधता है। राम ने पिता का वचन कमज़ोर करने के बजाय सिंहासन छोड़ा। जो शासक स्वयं को नियम से ऊपर रखे, वह दूसरों से पालन नहीं करा सकता।
- कसौटी सबसे निर्बल है। राजा की परख उस व्यक्ति की दशा से होती है जिसके पास सबसे कम शक्ति है।
- सुनना। राम प्रजा के बीच गए और उसकी राय को भारी व्यक्तिगत मूल्य चुकाकर भी गम्भीरता से लिया; देखें उत्तरकाण्ड।
- सत्ता से निजी लाभ नहीं। लंका जीती और कुछ नहीं रखा। किष्किन्धा सुग्रीव को दी, लंका विभीषण को।
राम से पहले चौदह वर्ष उनकी पादुकाओं ने राज किया। भरत ने स्वामी नहीं, न्यासी बनकर शासन किया। सार्वजनिक पद की इससे अच्छी संक्षिप्त परिभाषा नहीं।
इसे कैसे अपनाएँ
- यदि आप किसी का भी नेतृत्व करते हैं, तो नियमों में स्वयं को दूसरों से अधिक कठोरता से बाँधें।
- नियमित रूप से पूछें: मेरी देखरेख में सबसे बुरी दशा में कौन है, और उसकी सहायता कैसे हो?
- ऐसा वातावरण बनाएँ कि लोग आपको बुरी ख़बर निडर होकर दे सकें।
- अधिकार को भरत की तरह कुछ समय की धरोहर मानें।
- लोगों को उचित और समय पर पारिश्रमिक दें।
आगे: सीता की गरिमा और दृढ़ता। राम के पूर्वजों ने यह परम्परा रची: देखें रघु और दिलीप।
अंतिम अद्यतन:
आगे पढ़ें
बालकाण्ड: श्रीराम का जन्म और बाल्यकाल
रामायण का पहला काण्ड: दशरथ का यज्ञ, अयोध्या में चारों राजकुमारों का जन्म, विश्वामित्र के साथ यात्रा और राम-सीता का विवाह।
अयोध्याकाण्ड: वचन और वनवास
रामायण का दूसरा काण्ड: राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी के दो वर, सीता-लक्ष्मण सहित राम का वनवास, और भरत का राज्य लेने से इनकार।
उत्तरकाण्ड: रामराज्य और उसके बाद
रामायण का सातवाँ काण्ड: राम का शासन, वाल्मीकि आश्रम में सीता, लव-कुश का जन्म, और सरयू तट पर राम का महाप्रस्थान।
सीता: भूमिजा, जनकनन्दिनी
राजा जनक को हल की रेखा में मिलीं, श्रीराम की पत्नी सीता: जन्म, विवाह, वनवास, लंका में बन्दी जीवन, पुत्र, और वे लक्ष्मी-स्वरूपा क्यों पूजी जाती हैं।
जटायु: रावण से लड़ने वाले गिद्धराज
दशरथ के मित्र, वृद्ध गिद्धराज जटायु ने सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध किया और श्रीराम की गोद में प्राण त्यागे। असम्भव के विरुद्ध साहस की कथा।
महर्षि वाल्मीकि: आदिकवि
रामायण के रचयिता और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि: शोक से पहला श्लोक कैसे जन्मा, और कथा के भीतर उनकी अपनी भूमिका।