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श्री दुर्गा सप्तशती: सभी 13 अध्याय सरल हिन्दी अर्थ सहित

दुर्गा सप्तशती अध्याय 6: धूम्रलोचन वध

अध्याय 6: देवी के उत्तर से क्रोधित शुम्भ अपने सेनापति धूम्रलोचन को साठ हज़ार असुरों के साथ देवी को बलपूर्वक लाने भेजता है; देवी केवल "हुं" के उच्चारण से उसे भस्म कर देती हैं और उनका सिंह सेना का संहार करता है।

चित्रण: दुर्गा सप्तशती अध्याय 6: धूम्रलोचन वध
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छठा अध्याय छोटा है, पर इसका सन्देश बड़ा है: देवी की केवल एक "हुंकार" ही बुराई को भस्म करने के लिए पर्याप्त है।

शुम्भ का क्रोध

दूत ने लौटकर शुम्भ को देवी की सारी बात विस्तार से सुनाई। यह सुनकर शुम्भ अत्यन्त क्रोधित हुआ और अपने सेनापति धूम्रलोचन से बोला: तुम अपनी सेना लेकर जाओ और उस दुष्ट स्त्री को बालों से पकड़कर घसीटते हुए यहाँ ले आओ। यदि कोई उसकी रक्षा करने आए, चाहे देवता हो, यक्ष हो या गन्धर्व, उसे भी मार डालो।

धूम्रलोचन का आक्रमण

धूम्रलोचन साठ हज़ार असुरों की सेना के साथ हिमालय पर पहुँचा और देवी को देखकर ऊँचे स्वर में बोला: चुपचाप मेरे साथ शुम्भ-निशुम्भ के पास चलो, नहीं तो मैं तुम्हें बालों से पकड़कर घसीटता हुआ ले जाऊँगा।

देवी ने शान्त भाव से कहा: तुम्हें असुरराज ने भेजा है, तुम स्वयं बलवान हो, और सेना भी साथ है। यदि बलपूर्वक ले जाओगे, तो मैं तुम्हारा क्या कर सकती हूँ?

एक हुंकार

यह सुनकर धूम्रलोचन देवी की ओर दौड़ा। तभी अम्बिका ने केवल "हुं" शब्द (हुंकार) का उच्चारण किया, और उसी से धूम्रलोचन जलकर भस्म हो गया।

यह देखकर असुरों की सेना क्रोध में भरकर देवी पर तीखे बाण, शक्ति और फरसे बरसाने लगी। तब देवी का वाहन सिंह क्रोध से गर्दन के बाल हिलाता हुआ, भयंकर गर्जना करता हुआ असुर सेना पर टूट पड़ा। उसने किसी को पंजों से, किसी को मुख से, किसी को पैरों से कुचलकर, और किसी की छाती अपने नाखूनों से फाड़कर मार डाला। थोड़ी ही देर में पूरी सेना नष्ट हो गई।

शुम्भ का अगला आदेश

धूम्रलोचन के मारे जाने और सेना के नष्ट होने का समाचार सुनकर शुम्भ का क्रोध और बढ़ गया। उसने चण्ड और मुण्ड नाम के दो महाबली असुरों को आज्ञा दी: तुम बहुत बड़ी सेना लेकर जाओ, उस स्त्री को केश पकड़कर या बाँधकर शीघ्र यहाँ लाओ। यदि यह न हो सके, तो सब अस्त्रों और सारे असुरों के साथ उसे मार डालो। उसके घायल होने और सिंह के मारे जाने के बाद उसे बाँधकर ले आना।

इस अध्याय की सीख

  • सच्ची शक्ति को दिखावे की आवश्यकता नहीं; देवी के एक शब्द में इतनी शक्ति थी।
  • धूम्रलोचन (धुएँ वाली आँखें) भ्रम और धुँधली दृष्टि का प्रतीक है; सत्य के एक स्वर से भ्रम मिट जाता है।
  • किसी को बलपूर्वक खींचकर ले जाने का अहंकार, विशेषकर स्त्री को, सबसे बड़ा अधर्म है और उसका अन्त निश्चित है।
  • मन्त्रों के बीज अक्षर (जैसे "हुं") में बड़ी शक्ति मानी जाती है; श्रद्धा से उच्चारण का महत्त्व।

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