श्री दुर्गा सप्तशती: सभी 13 अध्याय सरल हिन्दी अर्थ सहित
दुर्गा सप्तशती अध्याय 2: देवताओं के तेज से देवी का प्राकट्य और महिषासुर की सेना का संहार
अध्याय 2: महिषासुर देवताओं को स्वर्ग से निकाल देता है; ब्रह्मा, विष्णु, शिव और सब देवताओं के क्रोध और तेज से देवी प्रकट होती हैं, सबके दिए अस्त्र धारण करती हैं, और महिषासुर की सेना का संहार करती हैं।
अपनी भाषा में पढ़ें
English · বাংলা · मराठी · ગુજરાતી · ਪੰਜਾਬੀ · தமிழ் · తెలుగు · ಕನ್ನಡ · മലയാളം · ଓଡ଼ିଆ · नेपाली · اردو
अन्य भाषाएँ गूगल अनुवाद से खुलती हैं; फिर आपका फ़ोन उस भाषा में पृष्ठ पढ़कर सुना सकता है।दूसरे अध्याय से "मध्यम चरित्र" आरम्भ होता है, जिसकी देवी महालक्ष्मी हैं। यह वह प्रसिद्ध प्रसंग है जिसमें सब देवताओं की शक्ति मिलकर एक देवी के रूप में प्रकट होती है।
महिषासुर का अत्याचार
प्राचीन काल में देवताओं और असुरों में पूरे सौ वर्ष युद्ध हुआ। असुरों का स्वामी महिषासुर (भैंसे के रूप वाला असुर) था और देवताओं के स्वामी इन्द्र। देवताओं की सेना हार गई, और महिषासुर स्वयं इन्द्र बनकर स्वर्ग पर बैठ गया। पराजित देवता ब्रह्मा जी को आगे करके भगवान शिव और विष्णु के पास गए और सारी व्यथा सुनाई: महिषासुर ने सूर्य, इन्द्र, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, यम, वरुण, सबके अधिकार छीन लिए हैं, और देवता मनुष्यों की तरह पृथ्वी पर भटक रहे हैं।
देवी का प्राकट्य
यह सुनकर विष्णु जी और शिव जी को बड़ा क्रोध आया। उनके और ब्रह्मा जी के मुख से एक महान तेज निकला। फिर इन्द्र और सब देवताओं के शरीर से भी तेज निकला, और वह सारा तेज एक जगह इकट्ठा होकर ज्वाला से भरे पर्वत जैसा दिखने लगा। वह तेज एक स्त्री के रूप में बदल गया, जिसके प्रकाश से तीनों लोक भर गए।
- शिव जी के तेज से देवी का मुख बना, यम के तेज से केश, विष्णु के तेज से भुजाएँ।
- चन्द्रमा के तेज से स्तन, इन्द्र के तेज से कमर, वरुण के तेज से जाँघें, पृथ्वी के तेज से नितम्ब।
- ब्रह्मा के तेज से चरण, सूर्य के तेज से पैरों की उँगलियाँ, वसुओं के तेज से हाथों की उँगलियाँ।
- कुबेर के तेज से नासिका, प्रजापति के तेज से दाँत, अग्नि के तेज से तीनों नेत्र, सन्ध्या के तेज से भौंहें, वायु के तेज से कान।
देवताओं के अस्त्र-शस्त्र
सब देवताओं ने अपनी शक्ति के प्रतीक देवी को भेंट किए:
- शिव जी ने अपने त्रिशूल से निकालकर त्रिशूल, विष्णु जी ने चक्र, वरुण ने शंख, अग्नि ने शक्ति (भाला), वायु ने धनुष और बाणों से भरे तरकश।
- इन्द्र ने वज्र और ऐरावत का घण्टा, यम ने कालदण्ड, वरुण ने पाश, ब्रह्मा ने रुद्राक्ष की माला और कमण्डलु।
- सूर्य ने रोमों में अपनी किरणें, काल ने चमकती तलवार और ढाल, क्षीरसागर ने निर्मल हार और कभी पुराने न होने वाले वस्त्र, दिव्य चूड़ामणि, कुण्डल, कंगन और नूपुर।
- विश्वकर्मा ने फरसा और अनेक अस्त्र और कवच, समुद्र ने कभी न मुरझाने वाली कमल की माला, हिमालय ने सवारी के लिए सिंह और रत्न, कुबेर ने मधु से भरा पात्र, और शेषनाग ने मणियों से सजा नागहार।
देवी का अट्टहास और युद्ध
अस्त्रों से सजी देवी ने बार-बार ऊँचे स्वर में अट्टहास किया, जिससे आकाश गूँज उठा, पृथ्वी काँपी और समुद्र उछलने लगे। देवताओं ने "जय" के नारे लगाए, और ऋषियों ने भक्ति से स्तुति की।
तीनों लोकों को क्षुब्ध देखकर असुर सेना सजाकर दौड़ी। महिषासुर ने देखा कि देवी अपने तेज से तीनों लोकों को प्रकाशित कर रही हैं। उसके सेनापति चिक्षुर, चामर, उदग्र, महाहनु, असिलोमा, बाष्कल, परिवारित, बिडाल और अनेक दूसरे करोड़ों रथ, हाथी, घोड़े और पैदल सैनिकों के साथ लड़ने आए।
देवी ने खेल-खेल में अस्त्रों की वर्षा करके उनके शस्त्र काट दिए। उनकी हर साँस से सैकड़ों-हज़ारों गण (सैनिक) उत्पन्न होकर असुरों से लड़ने लगे। देवी का सिंह असुर सेना में ऐसे घूमने लगा जैसे वन में दावानल। देवी ने त्रिशूल, गदा, शक्ति, तलवार और बाणों से असुरों का संहार किया, और थोड़ी ही देर में महिषासुर की विशाल सेना नष्ट हो गई। देवताओं ने आकाश से फूल बरसाए।
इस अध्याय की सीख
- जब सब शक्तियाँ अलग-अलग हारती हैं, तो मिलकर एक हो जाती हैं; एकता ही सबसे बड़ी शक्ति है।
- देवी हर देवता के तेज से बनी हैं; हर अच्छी शक्ति उन्हीं का अंश है।
- स्त्री शक्ति ही संसार की रक्षक है; जहाँ देवता हार गए, वहाँ देवी ने विजय पाई।
- अन्याय कितना भी बड़ा हो, उसकी सेना धर्म की शक्ति के सामने टिक नहीं सकती।
अंतिम अद्यतन:
आगे पढ़ें
शिव पुराण: सम्पूर्ण कथा संहिता-दर-संहिता सरल हिन्दी में
शिव पुराण अपनी सात संहिताओं में, क्रम से: शिव महिमा, अग्नि-स्तम्भ की कथा, सती और पार्वती, कार्तिकेय और गणेश का जन्म, द्वादश ज्योतिर्लिंग, शिव के अवतार और शिव पूजा की विध…
विष्णु पुराण: सभी छह अंश सरल हिन्दी में
महर्षि पराशर द्वारा मैत्रेय को सुनाया गया विष्णु पुराण, छह अंशों में: सृष्टि, ध्रुव और प्रह्लाद, पृथ्वी और लोक, सूर्य और चन्द्र वंश, श्रीकृष्ण चरित और कलियुग व प्रलय।
गरुड़ पुराण: सरल हिन्दी में भाग-दर-भाग
गरुड़ पुराण शान्त और सरल भाषा में, क्रम से: गरुड़ जी के प्रश्न, मृत्यु के बाद जीव की यात्रा, कर्म और उनके फल, तेरह दिनों के संस्कार, दान का महत्त्व और मोक्ष का मार्ग।
हनुमान चालीसा: सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित
गोस्वामी तुलसीदास रचित सम्पूर्ण हनुमान चालीसा, हर चौपाई के सरल अर्थ के साथ: कब पढ़ी जाती है और क्या सिखाती है।
श्रीराम स्तुति: श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन
गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीराम स्तुति "श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन": सम्पूर्ण पाठ, हर पद का सरल अर्थ, और यह कब गाई जाती है।