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श्रीराम जन्मभूमि प्रतीकश्रीराम जन्मभूमिअयोध्या · रामायण · यात्रा मार्गदर्शिका

ग्रन्थ अध्याय

धर्मग्रन्थों के सभी अध्याय: पढ़ें और सुनें

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चित्रण: धर्मग्रन्थों के सभी अध्याय: पढ़ें और सुनें

श्रीमद्भगवद्गीता: सभी 18 अध्याय सरल हिन्दी अर्थ सहित

  1. 1भगवद गीता अध्याय 1: अर्जुनविषादयोग — सरल हिन्दी अर्थ और सारगीता का पहला अध्याय, सभी 47 श्लोकों का भाव क्रम से: धृतराष्ट्र का प्रश्न, कुरुक्षेत्र में दोनों सेनाएँ, शंखनाद, और अर्जुन का शोक जिसके कारण…
  2. 2भगवद गीता अध्याय 2: सांख्ययोग — कर्मण्येवाधिकारस्ते और स्थितप्रज्ञ, सरल अर्थगीता का दूसरा अध्याय, सभी 72 श्लोकों का भाव क्रम से: अर्जुन की शरणागति, आत्मा की अमरता, क्षत्रिय धर्म, कर्मयोग और "कर्मण्येवाधिकारस्ते", तथ…
  3. 3भगवद गीता अध्याय 3: कर्मयोग — सरल हिन्दी अर्थ और सारगीता का तीसरा अध्याय, सभी 43 श्लोकों का भाव क्रम से: कोई कर्म क्यों नहीं छोड़ सकता, यज्ञ भाव से कर्म, लोकसंग्रह, स्वधर्म, और काम ही असली शत…
  4. 4भगवद गीता अध्याय 4: ज्ञानकर्मसंन्यासयोग — यदा यदा हि धर्मस्य, सरल अर्थगीता का चौथा अध्याय, सभी 42 श्लोकों का भाव क्रम से: इस ज्ञान की प्राचीन परम्परा, भगवान कब और क्यों अवतार लेते हैं, कर्म-अकर्म का रहस्य, यज्…
  5. 5भगवद गीता अध्याय 5: कर्मसंन्यासयोग — सरल हिन्दी अर्थ और सारगीता का पाँचवाँ अध्याय, सभी 29 श्लोकों का भाव क्रम से: संन्यास श्रेष्ठ है या कर्मयोग, कमल-पत्र की तरह निर्लेप जीवन, समदृष्टि, और ईश्वर को स…
  6. 6भगवद गीता अध्याय 6: आत्मसंयमयोग (ध्यानयोग) — ध्यान की विधि और मन का निग्रहगीता का छठा अध्याय, सभी 47 श्लोकों का भाव क्रम से: मनुष्य स्वयं अपना मित्र और शत्रु, ध्यान में कैसे बैठें, संयमित जीवन, चंचल मन को अभ्यास औ…
  7. 7भगवद गीता अध्याय 7: ज्ञानविज्ञानयोग — सरल हिन्दी अर्थ और सारगीता का सातवाँ अध्याय, सभी 30 श्लोकों का भाव क्रम से: भगवान की अपरा और परा प्रकृति, माला के धागे की तरह सबमें ईश्वर, त्रिगुणमयी माया, और चा…
  8. 8भगवद गीता अध्याय 8: अक्षरब्रह्मयोग — अन्तकाल का स्मरण, सरल अर्थगीता का आठवाँ अध्याय, सभी 28 श्लोकों का भाव क्रम से: अर्जुन के सात प्रश्न, अन्त समय का स्मरण, ओंकार और ध्यान, ब्रह्मा का दिन और रात, तथा शु…
  9. 9भगवद गीता अध्याय 9: राजविद्याराजगुह्ययोग — पत्रं पुष्पं फलं तोयं, सरल अर्थगीता का नौवाँ अध्याय, सभी 34 श्लोकों का भाव क्रम से: राजविद्या, सब प्राणी ईश्वर में कैसे, ईश्वर जगत के माता-पिता, "योगक्षेमं वहाम्यहम्", पत…
  10. 10भगवद गीता अध्याय 10: विभूतियोग — भगवान की विभूतियाँ, सरल अर्थगीता का दसवाँ अध्याय, सभी 42 श्लोकों का भाव क्रम से: भगवान सबके मूल, भक्त के हृदय में ज्ञान का दीपक, अर्जुन की स्तुति, और सूर्य, ओंकार से ल…
  11. 11भगवद गीता अध्याय 11: विश्वरूपदर्शनयोग — विराट रूप का दर्शन, सरल अर्थगीता का ग्यारहवाँ अध्याय, सभी 55 श्लोकों का भाव क्रम से: अर्जुन विराट रूप देखना चाहते हैं, दिव्य दृष्टि पाते हैं, सारे लोक और काल में समाते…
  12. 12भगवद गीता अध्याय 12: भक्तियोग — प्रिय भक्त के लक्षण, सम्पूर्ण सरल अर्थगीता का बारहवाँ अध्याय, सभी 20 श्लोकों का भाव क्रम से: साकार या निराकार उपासना, हर प्रकार के व्यक्ति के लिए साधना की सीढ़ी, और भगवान को प्र…
  13. 13भगवद गीता अध्याय 13: क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग — शरीर और आत्मा, सरल अर्थगीता का तेरहवाँ अध्याय, सभी 34 श्लोकों का भाव क्रम से: शरीर क्षेत्र और आत्मा क्षेत्रज्ञ, सच्चे ज्ञान के बीस लक्षण, जानने योग्य परमात्मा, तथ…
  14. 14भगवद गीता अध्याय 14: गुणत्रयविभागयोग — सत्त्व, रज, तम, सरल अर्थगीता का चौदहवाँ अध्याय, सभी 27 श्लोकों का भाव क्रम से: ईश्वर सबके पिता, सत्त्व, रज और तम कैसे बाँधते हैं, उनके लक्षण और फल, और तीनों गुणों…
  15. 15भगवद गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तमयोग — सम्पूर्ण सरल हिन्दी अर्थगीता का पन्द्रहवाँ अध्याय, सभी 20 श्लोकों का भाव क्रम से: संसार रूपी उल्टा अश्वत्थ वृक्ष, वैराग्य से उसे काटना, जीव ईश्वर का सनातन अंश, भोज…
  16. 16भगवद गीता अध्याय 16: दैवासुरसम्पद्विभागयोग — दैवी और आसुरी गुण, सरल अर्थगीता का सोलहवाँ अध्याय, सभी 24 श्लोकों का भाव क्रम से: 26 दैवी गुण, आसुरी स्वभाव के लक्षण, उसकी अन्तहीन कामनाएँ और परिणाम, नरक के तीन द्वार…
  17. 17भगवद गीता अध्याय 17: श्रद्धात्रयविभागयोग — तीन प्रकार की श्रद्धा, आहार, तप और दानगीता का सत्रहवाँ अध्याय, सभी 28 श्लोकों का भाव क्रम से: तीन गुणों के अनुसार श्रद्धा, सात्त्विक, राजस और तामस आहार, यज्ञ, शरीर, वाणी और मन क…
  18. 18भगवद गीता अध्याय 18: मोक्षसंन्यासयोग — सर्वधर्मान्परित्यज्य, गीता का निष्कर्षगीता का अठारहवाँ अध्याय, सभी 78 श्लोकों का भाव क्रम से: सच्चा त्याग, कर्म के पाँच कारण, तीन प्रकार के ज्ञान, कर्म, कर्ता, बुद्धि, धृति और स…

शिव पुराण: सम्पूर्ण कथा संहिता-दर-संहिता सरल हिन्दी में

  1. 1शिव पुराण विद्येश्वर संहिता: शिव पुराण माहात्म्य, शिवलिंग, पंचाक्षर और रुद्राक्षशिव पुराण का पहला भाग: इस पुराण के श्रवण की महिमा, देवराज और चंचुला की कथा, ब्रह्मा-विष्णु के बीच अग्नि-स्तम्भ, शिवलिंग पूजा, "ॐ नमः शिवाय"…
  2. 2शिव पुराण रुद्र संहिता, सृष्टि खण्ड: नारद मोह, सृष्टि रचना और गुणनिधि-कुबेर कथारुद्र संहिता का सृष्टि खण्ड: विष्णु की माया से नारद जी का अभिमान कैसे टूटा, सदाशिव से सृष्टि, रुद्र का प्रकट होना, और गुणनिधि की कथा जो आगे…
  3. 3शिव पुराण रुद्र संहिता, सती खण्ड: सती-शिव विवाह, दक्ष यज्ञ और वीरभद्रसती खण्ड: दक्ष के घर सती का जन्म, तप और शिव से विवाह, वन में श्रीराम की परीक्षा, दक्ष का द्वेष, शिव के बिना यज्ञ, सती का देह-त्याग और वीरभद…
  4. 4शिव पुराण रुद्र संहिता, पार्वती खण्ड: पार्वती का तप, कामदेव दहन और शिव-पार्वती विवाहपार्वती खण्ड: हिमवान और मैना के घर पार्वती का जन्म, नारद की भविष्यवाणी, तारकासुर का वरदान, कामदेव दहन, अपर्णा बनकर पार्वती का तप, शिव की पर…
  5. 5शिव पुराण रुद्र संहिता, कुमार खण्ड: कार्तिकेय जन्म, तारकासुर वध और गणेश जन्म कथाकुमार खण्ड: कार्तिकेय का जन्म और कृत्तिकाओं द्वारा पालन, तारकासुर वध, पार्वती द्वारा गणेश की रचना, गजमुख, प्रथम पूज्य का वरदान और माता-पिता…
  6. 6शिव पुराण रुद्र संहिता, युद्ध खण्ड: त्रिपुरासुर, जलन्धर-वृन्दा, शंखचूड़ और अन्धकासुरयुद्ध खण्ड: एक बाण से त्रिपुर का दहन, जलन्धर और वृन्दा की कथा और तुलसी व शालग्राम की उत्पत्ति, शंखचूड़, अन्धकासुर जो भृंगी बने, और गजासुर।
  7. 7शिव पुराण शतरुद्र संहिता: शिव के अवतार — नन्दी, भैरव, वीरभद्र, शरभ, हनुमान और किरातशतरुद्र संहिता में शिव के अवतारों का वर्णन है: पाँच मुख, अर्धनारीश्वर, नन्दी, काशी के काल भैरव, वीरभद्र, नृसिंह को शान्त करने वाले शरभ, हनु…
  8. 8शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता: 12 ज्योतिर्लिंगों की कथाएँ और महाशिवरात्रि व्रत कथाकोटिरुद्र संहिता में सोमनाथ से घृष्णेश्वर तक बारहों ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति की कथाएँ, शिवरात्रि व्रत की व्याध (शिकारी) वाली कथा, और विष्…
  9. 9शिव पुराण उमा संहिता: दान, कर्मफल, यम मार्ग और देवी उमा की महिमाउमा संहिता: पुत्र के लिए श्रीकृष्ण द्वारा शिव की उपासना, दान के प्रकार और फल, पाप और उनके परिणाम, यमलोक का मार्ग, व्यास जी का जन्म, और महाक…
  10. 10शिव पुराण कैलास संहिता: ॐकार (प्रणव) का अर्थ, संन्यास और शिव उपासनाकैलास संहिता: पार्वती जी का शिव से ॐकार का अर्थ पूछना, वामदेव मुनि के कार्तिकेय से प्रश्न, संन्यास की विधि, शिव की आन्तरिक उपासना और "शिवोऽ…
  11. 11शिव पुराण वायवीय संहिता: शिव तत्त्व, पशु-पाश-पति, पाशुपत योग और उपमन्यु की कथाशिव पुराण का अन्तिम भाग, वायु देव द्वारा कथित: शिव पति, जीव पशु और बन्धन पाश, पाशुपत व्रत और शिव योग, बालक उपमन्यु की कथा, और पंचाक्षर से श…

विष्णु पुराण: सभी छह अंश सरल हिन्दी में

  1. 1विष्णु पुराण प्रथम अंश: सृष्टि, समुद्र मन्थन, ध्रुव चरित और प्रह्लाद कथाविष्णु पुराण का पहला अंश (22 अध्याय): मैत्रेय का प्रश्न, पराशर जी को पुराण कैसे मिला, विष्णु से सृष्टि, वराह अवतार, लक्ष्मी और समुद्र मन्थन…
  2. 2विष्णु पुराण द्वितीय अंश: सात द्वीप, भारतवर्ष की महिमा, सूर्य-रथ और जड़भरतविष्णु पुराण का दूसरा अंश (16 अध्याय): सात द्वीप और सात समुद्र, भारतवर्ष की महिमा, पाताल और नरक, सूर्य का रथ और ग्रह, जड़भरत की कथा और ऋभु-…
  3. 3विष्णु पुराण तृतीय अंश: मन्वन्तर, वेद विभाजन, वर्णाश्रम धर्म, सदाचार और श्राद्धविष्णु पुराण का तीसरा अंश (18 अध्याय): चौदह मनु, व्यास परम्परा और वेदों का विभाजन, यमराज का अपने दूतों को उपदेश, आश्रम धर्म, सदाचार और श्रा…
  4. 4विष्णु पुराण चतुर्थ अंश: सूर्यवंश और चन्द्रवंश — इक्ष्वाकु से श्रीराम तक, ययाति, यदु और पुरुविष्णु पुराण का चौथा अंश (24 अध्याय): इक्ष्वाकु से मान्धाता, हरिश्चन्द्र, सगर, भगीरथ, रघु और श्रीराम तक अयोध्या का सूर्यवंश, पुरूरवा, ययाति…
  5. 5विष्णु पुराण पंचम अंश: सम्पूर्ण श्रीकृष्ण चरित — जन्म से परमधाम गमन तकविष्णु पुराण का पाँचवाँ अंश (38 अध्याय), श्रीकृष्ण का जीवन: कंस के कारागार में जन्म, गोकुल-वृन्दावन की बाल लीलाएँ, गोवर्धन और रास, कंस वध,…
  6. 6विष्णु पुराण षष्ठ अंश: कलियुग, चार प्रकार के प्रलय, केशिध्वज-खाण्डिक्य संवाद और मोक्षविष्णु पुराण का अन्तिम अंश (8 अध्याय): कलियुग के लक्षण और कलियुग सबसे सरल क्यों, चार प्रकार के प्रलय, तीन प्रकार के दुःख, योग पर खाण्डिक्य-…

श्रीमद्भागवत महापुराण: सभी 12 स्कन्ध सरल हिन्दी में

  1. 1भागवत पुराण प्रथम स्कन्ध: भागवत की उत्पत्ति, अवतार, कुन्ती स्तुति और परीक्षित को शापप्रथम स्कन्ध (19 अध्याय): ऋषियों का सूत जी से प्रश्न, व्यास जी की अशान्ति और नारद जी का उपदेश, नारद जी के पूर्व जन्म की कथा, अवतारों की सूच…
  2. 2भागवत पुराण द्वितीय स्कन्ध: शुकदेव जी का उपदेश, विराट पुरुष और चतुःश्लोकी भागवतद्वितीय स्कन्ध (10 अध्याय): मृत्यु निकट हो तो क्या करें, विराट पुरुष का ध्यान, राजा खट्वांग, ब्रह्मा जी को भगवान के दर्शन, चतुःश्लोकी भागवत…
  3. 3भागवत पुराण तृतीय स्कन्ध: विदुर-उद्धव संवाद, वराह अवतार, कर्दम-देवहूति और कपिल उपदेशतृतीय स्कन्ध (33 अध्याय): विदुर जी की उद्धव और मैत्रेय से भेंट, ब्रह्मा की सृष्टि, वराह अवतार और हिरण्याक्ष वध, जय-विजय, कर्दम-देवहूति, और…
  4. 4भागवत पुराण चतुर्थ स्कन्ध: दक्ष यज्ञ, ध्रुव चरित, राजा पृथु और पुरंजन की कथाचतुर्थ स्कन्ध (31 अध्याय): दक्ष यज्ञ और सती, बालक ध्रुव का तप और ध्रुव पद, पृथ्वी को दुहने वाले राजा पृथु, प्रचेता, और नारद जी की राजा पुरं…
  5. 5भागवत पुराण पंचम स्कन्ध: ऋषभदेव, जड़भरत, भूगोल, ज्योतिष चक्र और नरक वर्णनपंचम स्कन्ध (26 अध्याय): राजा प्रियव्रत, ऋषभदेव का पुत्रों को उपदेश, भरत और जड़भरत की कथा, द्वीप और वर्ष, सूर्य और ग्रह, पाताल और नरकों का…
  6. 6भागवत पुराण षष्ठ स्कन्ध: अजामिल उद्धार, नाम महिमा, नारायण कवच और वृत्रासुरषष्ठ स्कन्ध (19 अध्याय): "नारायण" नाम पुकारने से अजामिल का उद्धार, यमराज द्वारा नाम महिमा, दक्ष पुत्र और नारद, नारायण कवच, दधीचि की अस्थिया…
  7. 7भागवत पुराण सप्तम स्कन्ध: प्रह्लाद चरित, नृसिंह अवतार और नवधा भक्तिसप्तम स्कन्ध (15 अध्याय): भगवान पक्षपाती क्यों दिखते हैं, हिरण्यकशिपु का तप और अत्याचार, प्रह्लाद द्वारा नवधा भक्ति, नृसिंह अवतार, प्रह्लाद…
  8. 8भागवत पुराण अष्टम स्कन्ध: गजेन्द्र मोक्ष, समुद्र मन्थन, मोहिनी, वामन अवतार और मत्स्यअष्टम स्कन्ध (24 अध्याय): मन्वन्तर, ग्राह से गजेन्द्र की रक्षा, समुद्र मन्थन और शिव जी का विषपान, मोहिनी, वामन अवतार और राजा बलि, तथा मत्स्…
  9. 9भागवत पुराण नवम स्कन्ध: सूर्यवंश, श्रीराम कथा, अम्बरीष, परशुराम और चन्द्रवंशनवम स्कन्ध (24 अध्याय): मनु वंश, राजा अम्बरीष और दुर्वासा, अयोध्या का सूर्यवंश, भगीरथ और संक्षिप्त सम्पूर्ण श्रीराम कथा, परशुराम, ययाति, और…
  10. 10भागवत पुराण दशम स्कन्ध: सम्पूर्ण श्रीकृष्ण लीला — जन्म, ब्रज, मथुरा और द्वारकादशम स्कन्ध (90 अध्याय), भागवत का हृदय: कृष्ण जन्म, गोकुल-वृन्दावन की लीलाएँ, गोवर्धन, रास और गोपी गीत, कंस वध, उद्धव का ब्रज जाना, द्वारका,…
  11. 11भागवत पुराण एकादश स्कन्ध: उद्धव गीता, अवधूत के 24 गुरु और यदुवंश का अन्तएकादश स्कन्ध (31 अध्याय): यदुवंश को ऋषियों का शाप, नौ योगेश्वरों का राजा निमि को उपदेश, अवधूत के चौबीस गुरु, उद्धव को श्रीकृष्ण का अन्तिम उ…
  12. 12भागवत पुराण द्वादश स्कन्ध: कलियुग, परीक्षित की मुक्ति, मार्कण्डेय कथा और भागवत माहात्म्यद्वादश स्कन्ध (13 अध्याय): कलियुग के राजा और लक्षण, कल्कि अवतार, शुकदेव जी का अन्तिम उपदेश, परीक्षित की मुक्ति, जनमेजय का सर्प यज्ञ, मार्कण…

श्री दुर्गा सप्तशती: सभी 13 अध्याय सरल हिन्दी अर्थ सहित

  1. 1दुर्गा सप्तशती अध्याय 1: राजा सुरथ, समाधि वैश्य और मधु-कैटभ वध (प्रथम चरित्र)दुर्गा सप्तशती का पहला अध्याय: राजा सुरथ और समाधि वैश्य मेधा ऋषि से पूछते हैं कि मोह क्यों नहीं छूटता; ऋषि महामाया की महिमा, ब्रह्मा जी की…
  2. 2दुर्गा सप्तशती अध्याय 2: देवताओं के तेज से देवी का प्राकट्य और महिषासुर की सेना का संहारअध्याय 2: महिषासुर देवताओं को स्वर्ग से निकाल देता है; ब्रह्मा, विष्णु, शिव और सब देवताओं के क्रोध और तेज से देवी प्रकट होती हैं, सबके दिए…
  3. 3दुर्गा सप्तशती अध्याय 3: सेनापतियों का वध और महिषासुर मर्दनअध्याय 3: देवी चिक्षुर, चामर और महिषासुर के अन्य सेनापतियों का वध करती हैं; महिषासुर भैंसे के रूप में आक्रमण करता है, बार-बार रूप बदलता है,…
  4. 4दुर्गा सप्तशती अध्याय 4: शक्रादि स्तुति — देवताओं द्वारा देवी की स्तुति और वरदानअध्याय 4: महिषासुर वध के बाद इन्द्र आदि देवता देवी की प्रसिद्ध स्तुति करते हैं, और देवी वरदान देती हैं कि संकट में स्मरण करने पर वे आएँगी औ…
  5. 5दुर्गा सप्तशती अध्याय 5: "या देवी सर्वभूतेषु" स्तुति, कौशिकी का प्राकट्य और शुम्भ का दूतअध्याय 5 से उत्तम चरित्र आरम्भ: शुम्भ-निशुम्भ स्वर्ग छीन लेते हैं; देवता हिमालय पर "या देवी सर्वभूतेषु" से स्तुति करते हैं; पार्वती के शरीर…
  6. 6दुर्गा सप्तशती अध्याय 6: धूम्रलोचन वधअध्याय 6: देवी के उत्तर से क्रोधित शुम्भ अपने सेनापति धूम्रलोचन को साठ हज़ार असुरों के साथ देवी को बलपूर्वक लाने भेजता है; देवी केवल "हुं"…
  7. 7दुर्गा सप्तशती अध्याय 7: चण्ड-मुण्ड वध और देवी का "चामुण्डा" नामअध्याय 7: चण्ड और मुण्ड आक्रमण करते हैं; देवी के क्रोध से टेढ़ी भौंहों वाले ललाट से भयंकर काली प्रकट होती हैं, जो सेना को निगल जाती हैं और…
  8. 8दुर्गा सप्तशती अध्याय 8: सप्त मातृकाएँ, शिवदूती और रक्तबीज वधअध्याय 8: शुम्भ पूरी सेना भेजता है; देवताओं की शक्तियाँ मातृकाओं के रूप में प्रकट होती हैं; देवी शिव जी को दूत बनाकर भेजती हैं और "शिवदूती"…
  9. 9दुर्गा सप्तशती अध्याय 9: निशुम्भ वधअध्याय 9: राजा सुरथ आगे की कथा पूछते हैं; निशुम्भ असुरों के साथ युद्ध करता है, देवी से भयंकर लड़ता है, गिरकर दस हज़ार भुजाओं के साथ फिर उठत…
  10. 10दुर्गा सप्तशती अध्याय 10: शुम्भ वध — "एकैवाहं जगत्यत्र"अध्याय 10: शुम्भ ताना मारता है कि तुम दूसरों के बल पर लड़ती हो; देवी सब मातृकाओं को अपने में लीन करके कहती हैं कि इस संसार में मैं एक ही हू…
  11. 11दुर्गा सप्तशती अध्याय 11: नारायणी स्तुति — सर्वमङ्गलमङ्गल्ये, और देवी के भावी अवतारअध्याय 11: अग्नि आदि देवता हिन्दू धर्म की सबसे प्रिय स्तुतियों में से एक, नारायणी स्तुति, से देवी की वन्दना करते हैं, और देवी वचन देती हैं…
  12. 12दुर्गा सप्तशती अध्याय 12: देवी माहात्म्य के पाठ का फल (फलश्रुति)अध्याय 12, फलश्रुति: देवी स्वयं बताती हैं कि इस कथा के पाठ या श्रवण से क्या मिलता है: भय, रोग, शत्रु और विपत्ति से रक्षा, विशेषकर अष्टमी, न…
  13. 13दुर्गा सप्तशती अध्याय 13: राजा सुरथ और वैश्य को देवी का वरदानअध्याय 13, समापन: राजा सुरथ और समाधि वैश्य नदी तट पर तीन वर्ष देवी की आराधना करते हैं; देवी प्रकट होती हैं; राजा राज्य माँगते हैं और उसके स…

गरुड़ पुराण: सरल हिन्दी में भाग-दर-भाग

  1. 1गरुड़ पुराण पूर्व खण्ड (आचार काण्ड): धर्म, व्रत, आयुर्वेद और गरुड़ नीतिगरुड़ पुराण का पहला भाग: गरुड़ जी को विष्णु से यह पुराण कैसे मिला, अवतार, पूजा और व्रत, तीर्थ, आयुर्वेद और रत्न, और गरुड़ नीति, दैनिक जीवन…
  2. 2गरुड़ पुराण: गरुड़ जी के प्रश्न और मृत्यु के समय क्या करेंप्रेत खण्ड का आरम्भ: गरुड़ जी पूछते हैं कि प्राणी क्यों मरते हैं और उसके बाद क्या होता है; भगवान विष्णु मृत्यु के निकट आने के लक्षण और मरणा…
  3. 3गरुड़ पुराण: मृत्यु के बाद जीव की यात्रा, यम मार्ग और वैतरणी नदीगरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद क्या होता है: पिण्डदान से बनने वाला सूक्ष्म शरीर, यमपुरी तक का लम्बा मार्ग, पुण्यात्मा और पापी के लिए उ…
  4. 4गरुड़ पुराण: यमराज की सभा, चित्रगुप्त और कर्मों का फलगरुड़ पुराण में यमराज की सभा: चित्रगुप्त का लेखा, यमराज सज्जनों को सौम्य और क्रूर लोगों को भयंकर क्यों दिखते हैं, और वे बुरे कर्म जिनसे पुर…
  5. 5गरुड़ पुराण: तेरह दिनों के संस्कार, पिण्डदान, सपिण्डीकरण, श्राद्ध और नारायण बलिमृत्यु के बाद के संस्कारों के बारे में गरुड़ पुराण क्या कहता है: दस दिन का पिण्डदान, ग्यारहवें और बारहवें दिन के कर्म, सपिण्डीकरण, तेरहवीं,…
  6. 6गरुड़ पुराण: पुनर्जन्म, कर्मों के अनुसार नया जन्म और मोक्ष का मार्गगरुड़ पुराण का समापन उपदेश: कर्म अगला जन्म कैसे तय करते हैं, मनुष्य जन्म क्यों अनमोल है, और ज्ञान, भक्ति, दान और सदाचार से जन्म-मृत्यु के च…

श्री सत्यनारायण व्रत कथा: पाँचों अध्याय और पूजा विधि

  1. 1सत्यनारायण व्रत कथा प्रथम अध्याय: नारद जी का प्रश्न और व्रत की उत्पत्तिसत्यनारायण कथा का पहला अध्याय: ऋषि सूत जी से पूछते हैं कि लोगों के दुःख कैसे मिटें; नारद जी वैकुण्ठ में भगवान विष्णु से यही पूछते हैं, और भ…
  2. 2सत्यनारायण व्रत कथा द्वितीय अध्याय: निर्धन ब्राह्मण और लकड़हारे की कथाअध्याय 2: काशी में एक निर्धन ब्राह्मण को स्वयं भगवान वृद्ध ब्राह्मण के रूप में व्रत बताते हैं और वह समृद्ध हो जाता है; एक प्यासा लकड़हारा प…
  3. 3सत्यनारायण व्रत कथा तृतीय अध्याय: राजा उल्कामुख, साधु वैश्य और कलावतीअध्याय 3: साधु नाम का वैश्य राजा उल्कामुख को व्रत करते देखकर सन्तान होने पर व्रत करने का वचन देता है; पुत्री कलावती होती है, पर वह व्रत टाल…
  4. 4सत्यनारायण व्रत कथा चतुर्थ अध्याय: लता-पत्र वाली नाव और कलावती का प्रसाद छोड़नाअध्याय 4: घर लौटते समय वैश्य दण्डी संन्यासी वेषधारी भगवान से झूठ बोलता है और उसका धन लता-पत्र बन जाता है, जब तक वह क्षमा नहीं माँगता; घर पर…
  5. 5सत्यनारायण व्रत कथा पंचम अध्याय: राजा तुंगध्वज और ग्वालों का प्रसादअध्याय 5: राजा तुंगध्वज पेड़ के नीचे पूजा कर रहे ग्वालों के दिए प्रसाद का अनादर करता है और पुत्र व धन खो देता है; लौटकर विनम्रता से उनके सा…