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शिव पुराण: सम्पूर्ण कथा संहिता-दर-संहिता सरल हिन्दी में

शिव पुराण रुद्र संहिता, सृष्टि खण्ड: नारद मोह, सृष्टि रचना और गुणनिधि-कुबेर कथा

रुद्र संहिता का सृष्टि खण्ड: विष्णु की माया से नारद जी का अभिमान कैसे टूटा, सदाशिव से सृष्टि, रुद्र का प्रकट होना, और गुणनिधि की कथा जो आगे कुबेर बने।

चित्रण: शिव पुराण रुद्र संहिता, सृष्टि खण्ड: नारद मोह, सृष्टि रचना और गुणनिधि-कुबेर कथा
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रुद्र संहिता शिव पुराण का सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध भाग है, जिसमें शिव की कथाएँ विस्तार से हैं। इसका पहला खण्ड, सृष्टि खण्ड, नारद जी के प्रश्नों से शुरू होता है और ब्रह्मा जी उत्तर में सृष्टि की कथा सुनाते हैं।

नारद मोह की कथा

एक बार देवर्षि नारद हिमालय की एक सुन्दर गुफा में तपस्या करने बैठे। उनका तप देखकर इन्द्र डर गए और कामदेव को भेजा। कामदेव ने वसन्त के साथ हर उपाय किया, पर नारद जी का मन नहीं डिगा, क्योंकि वह स्थान शिव के प्रभाव से काम से अछूता था। नारद जी को लगा कि उन्होंने काम को जीत लिया। वे गर्व से भरकर शिव जी, ब्रह्मा जी और विष्णु जी को यह बताने गए। शिव जी ने उन्हें समझाया कि यह बात विष्णु जी से न कहना, पर नारद जी नहीं माने।

विष्णु जी ने नारद जी का अहंकार दूर करने के लिए अपनी माया से एक सुन्दर नगर रचा, जहाँ राजा शीलनिधि की पुत्री श्रीमती का स्वयंवर हो रहा था। नारद जी राजकुमारी पर मोहित हो गए और विष्णु जी से प्रार्थना की कि मुझे अपना (हरि का) रूप दीजिए। "हरि" का एक अर्थ वानर भी है; विष्णु जी ने उन्हें वानर का मुख दे दिया। स्वयंवर में राजकुमारी ने नारद जी की ओर देखा भी नहीं और वर-माला स्वयं विष्णु जी को पहना दी। वहाँ बैठे शिव के दो गणों ने नारद जी की हँसी उड़ाई। जल में अपना मुख देखकर नारद जी क्रोधित हो गए।

उन्होंने गणों को राक्षस होने का शाप दिया और विष्णु जी को शाप दिया: जैसे मैं स्त्री के वियोग में दुःखी हुआ, वैसे ही आप भी मनुष्य बनकर पत्नी के वियोग में दुःख भोगेंगे, और जिन वानरों का रूप आपने मुझे दिया, वही आपकी सहायता करेंगे। माया हटने पर नारद जी को पश्चात्ताप हुआ। विष्णु जी ने शाप को स्वीकार किया और नारद जी को शिव का शतनाम जपने का उपदेश दिया। परम्परा इसी शाप को श्रीराम अवतार से जोड़ती है, जिसमें सीता का वियोग हुआ और वानरों ने सहायता की।

सृष्टि की रचना

नारद जी के पूछने पर ब्रह्मा जी ने बताया: प्रलय में जब कुछ नहीं था, तब केवल सदाशिव (परम ब्रह्म) थे। उन्होंने अपनी शक्ति (अम्बिका) के साथ शिवलोक (काशी) प्रकट किया। फिर उन्होंने अपने वाम अंग से एक पुरुष प्रकट किया, जो विष्णु कहलाए। विष्णु जी ने हज़ारों वर्ष तप किया; उनके शरीर से जल की धाराएँ बहीं और वे उस जल में सो गए, इसलिए "नारायण" कहलाए। उनकी नाभि से कमल निकला और उस कमल पर ब्रह्मा जी प्रकट हुए।

ब्रह्मा जी ने अपने मूल को खोजने के लिए कमल की नाल में बहुत समय तक यात्रा की पर कुछ न मिला। फिर विष्णु जी से विवाद हुआ, और अग्नि-स्तम्भ (शिवलिंग) प्रकट हुआ। शिव जी ने दोनों को ज्ञान दिया: ब्रह्मा सृष्टि करेंगे, विष्णु पालन करेंगे, और मेरा अंश रुद्र संहार करेगा। तीनों एक ही परमात्मा के तीन रूप हैं।

ब्रह्मा जी ने मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वसिष्ठ और नारद आदि मानस पुत्र उत्पन्न किए, और सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार भी, जिन्होंने सृष्टि में भाग लेने से इनकार किया। ब्रह्मा जी के भौंहों के बीच से भगवान रुद्र प्रकट हुए, जिन्होंने ब्रह्मा जी को सृष्टि में सहायता दी।

गुणनिधि और कुबेर की कथा

काम्पिल्य नगर में यज्ञदत्त नाम के एक धर्मात्मा ब्राह्मण का पुत्र गुणनिधि जुआरी और चोर बन गया। माँ उसके दोष पिता से छिपाती रही। जब पिता को सब पता चला, तो गुणनिधि घर छोड़कर भाग गया। भूखा-प्यासा भटकते हुए शिवरात्रि की रात वह एक शिव मन्दिर पहुँचा, जहाँ भक्त पूजा करके सो गए थे। प्रसाद चुराने के लिए उसने बुझते दीपक की बत्ती ठीक की ताकि रोशनी हो, और यह अनजाने में शिव को दीपदान बन गया। भागते समय वह पकड़ा गया और मारा गया।

यमदूत उसे ले जाने आए, पर शिवगणों ने कहा कि इसने शिवरात्रि का जागरण, उपवास (भूख के कारण) और दीपदान किया है। वह अगले जन्म में कलिंग के राजा अरिन्दम का पुत्र दम बना और जीवन भर शिव मन्दिरों में दीपक जलवाता रहा। फिर अगले जन्म में वह विश्रवा मुनि का पुत्र बनकर काशी में शिव की घोर तपस्या करके कुबेर बना: धन का स्वामी, यक्षों का राजा और शिव का मित्र। शिव जी उसकी मित्रता के कारण अलकापुरी के पास कैलास पर निवास करने लगे।

इस खण्ड की सीख

  • तप और साधना से भी बड़ा शत्रु उसका अहंकार है; नारद जैसे ऋषि भी इससे नहीं बचे।
  • ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक ही परमात्मा के रूप हैं; उनमें बड़ा-छोटा देखना अज्ञान है।
  • अनजाने में किया गया छोटा-सा पुण्य भी व्यर्थ नहीं जाता; शिव भोले हैं।
  • बुरे मार्ग पर गया व्यक्ति भी बदल सकता है; गुणनिधि चोर से कुबेर बने।

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